काली_फरवरी_के_बाद_मार्च_का_अभिनंदन

फरवरी का महीना इस देश के लिए बहुत बुरा रहा और 14 फरवरी से शुरू हुआ बुरी खबरों का दौर खत्म होने का नाम नहीं ले रहा, पुलवामा हमले से अब तक जवानों के शहीद होने की संख्या सैकड़ा छूने वाली है। कल देश में एक तरफ खुशी का माहौल था। एयरफोर्स के विंग कमांडर अभिनंदन सुरक्षित अपने देश में वापस लौट आऐ। एक बात जगजाहिर है चाहे दुनिया के किसी कोने में रहने वाले इंसान क्यों ना हो उन्हें केवल खुशी शौर्य हंसी सुख ही पसंद है बल्कि जिंदगी का दूसरा पहलू दुख मातम को देखते हुए भी इग्नोर कर दिया जाता है।

विंग कमांडर अभिनंदन का 52 घंटे में स्वदेश लौट आना विक्ट्री के तौर पर माना जा रहा है। जिस वक्त पूरे देश का ध्यान उनकी तरफ था। पूरे देश की मीडिया नेता मंत्री और जनता उनके आने की खुशी में झूम रही थी। दूसरी तरफ एक और बुरी खबर जम्मू कश्मीर के हिंदवाड़ा से आई जिस में 5 जवान शहीद हो गए। उस खबर का पता चलते हैं संवेदनशील लोगों के चेहरों पर अभिनंदन के आने की खुशी वाली मुस्कान वापस चले गई, लेकिन उन लोगों का क्या कीजिएगा जिन्हें यह पता होते हुए भी 5 शहीद हो गए हैं। उसके बावजूद भी विंग कमांडर अभिनंदन के आने की खुशी में नाचने लगे, वह जिंदा है उनके आने की खुशी लगभग सारे देश को और जो जवान शहीद होकर जो चले गए उनके जाने का दुख इस देश की थोड़ी सी जनता को हुआ।

इस एयर फोर्स के पायलट के लिए उसके आगे का भविष्य क्या होगा शायद ही इस देश के लोगों ने उस पर 
गौर किया है। अभिनंदन का पाकिस्तान में पकड़े जाना वहां के लोगों द्वारा मारपीट करना पाकिस्तानी फौज को दिए गए बयान और वहां उनके बिताए गए 52 घंटों में उनकी जिंदगी को इतना बदल दिया है। इस बात का शायद अंदाजा लौग लगा पा रहे हैं यह सब झूठ है।कि वह जब भारत की सर जमीन पर कदम रख रहे मुस्कुरा रहे थे। शायद उन्हें जरूर कोई ना कोई मलाल रहा होगा यह तो वही जानते हैं।अभी आगे क्या होने वाला है इस बारे में सोच कर भी शायद वह चुप थे।उन्होंने ब्लेजर पहना हुआ था क्लीन शेव थी मूछें ताव में थी।

उनका भारत में प्रवेश होते ही पाकिस्तान द्वारा वीडियो रिलीज कर देना जिसमें कम से कम सत्रह लगा कर 
एडिट किया गया है। और पाकिस्तान की आर्मी की सराहना और भारतीय मीडिया को गलत बताया गया है हमारे देश के उन्मादी लोगों ने उस वीडियो को अपलोड भी करना शुरू कर दिया, और यह कहना भी शुरू कर दिया कि अगर यह गलत है तो इसका खंडन खुद अभिनंदन करेंगे मतलब हर तरफ से वही फसगैं। $2000000 का विमान मिग-21 विमान उड़ाना कोई आसान काम नहीं है और उस वक्त तो यह काम और भी मुश्किल होता है ।जब वायु सेना कोई एयर स्ट्राइक करती है वायु सेना में गगन प्रहरी के पद पर पदस्थ हमारे परिवार के भाई से इस विषय में बात करते हुए पता चला उन्होंने कहा कि जिस तरह से मिग-21 ने एफ 16 को तोड़ा है जी बिल्कुल वैसा है! जैसा नोकिया 1100 मोबाइल फोन के साथ एप्पल के एक्स आईफोन की तुलना करना है क्योंकि fs16 सेकंड जनरेशन का विमान है और जिसकी कीमत 18000000 डॉलर है।

भारत की सेना के पास 123000 वायु सैनिक है। और पाकिस्तान की सेना के पास केवल 73000 वायु सैनिक 
एक वायु सैनिक को ट्रेंड करने के लिए वायु सेना बहुत बड़ा खर्च करती है। और एक अच्छी तनख्वाह देती है विंग कमांडर अभिनंदन की जगह अगर कोई नौसिखिया पायलट होता तो शायद ऐसा संभव नहीं हो पाता।

विमान के इस तरह के ऑपरेशन में क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में एक पायलट के ऊपर कितना और किस तरह 
का दबाव होता है शायद यह वही जान सकता है। इसके बारे में भी (नाम नही लिख सकता) एयर फोर्स मे तैनात भाई ने बताया कहा कि जब हमें आसमान में उड़ते हुए टारगेट को देख कर निशाना लगाना पड़ता है। हमारे आंकड़े कई बार सही नहीं होते फिर भी हम कोशिश करते हैं कि सही जगह पर टारगेट किया जाए उसके बाद अगर हमारा विमान सामने से आती कोई मिसाइल तोड़ दे तो सबसे पहले तो हमें यह कोशिश करनी पड़ती है, कि इस जहाज को कहीं आराम से लैंडिंग करवाई जाए क्योंकि हमें पता है इतने पैसों में खरीदा गया है और उसको खरीदने के लिए देश के कितने और किस-किस वर्ग के लोगों ने पैसे दिए हैं! हमें इस बात का भी अंदाजा रहता है। कि यह जहां जहां गिरेगा वहां पर बस्ती ना हो इसके गिरने से लोगों को जान माल का नुकसान ना हो हमारी जान के बारे में हमें सबसे आखरी में सोचना पड़ता है। अब हमारे बस में नहीं है और हमें पाॅयलेट सीट को खोलने वाला बटन दबाना और अपनी जान बचाना किसी फाइटर पायलेट की जहाज क्षतिग्रस्त होने की आखिरी प्रक्रिया है। अब हम इनका हमारे देश में सुरक्षित लौट आना इनकी किस्मत समझे या नए भारत का उदय या पाकिस्तान के ऊपर हमारे देश का दबाव या जिनेवा संधि जिसको जो कहना है वह अपने हिसाब से कह सकता है। जो जिसको श्रेय देना चाहें उसे दे सकता है। ऐसा नहीं है कि यह पहले भारतीय वायु सेना के जवान है। जो पाकिस्तान में पकड़े गए हैं इनसे पहले भी बहुत ऐसे जवान हैं जो पकड़े गए थे जिनका यह नहीं पता आज तक वह कहां गए ?पर हर कोई इतनी अच्छी किस्मत वाला नहीं होता जो इस तरह से पकड़ा जाए और सुरक्षित अपने घर वापस लौट कर आ जाए।कारगिल युद्ध के दौरान विंग कमांडर नचिकेता को भी पकड़ा गया था,वो भी 8 दिन बाद वापस लौट आऐ थे।परंतु उनके शरीर पर आज भी पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों द्वारा बुझाई गई सिगरेट के अनगिनत निशान जो की त्यों मौजूद है।

1999 मैं पाक की कैद में थे 6 जवान और पाकिस्तान ने क्रूरता की हदें पार कर दी थी। ऐसा पहली बार नहीं है 
जब पाकिस्तान की गिरफ्त में कोई भारतीय सैनिक गया हो युद्ध के दौरान हमारे देश के कैप्टन सौरव कालिया और उनके साथियों को पाकिस्तानी अपनी कैद में ले लिया था। जिस हालत में उनके शव भारत भेजे गए थे उस वक्त उन्हें पहचानना मुश्किल हो गया था 20 साल पहले की गई पाकिस्तान की घटना दर्शाती है। कि उसने कैसे बर्बरता की सारी हदें पार की थी।कैप्टन सौरभ कालिया ने कारगिल में पाकिस्तानी सैनिकों की बड़ी घुसपैठ का सामना किया था मई 1999 को कैप्टन कालिया और उनके पांच साथियों को पाकिस्तानी फौजियों ने बंदी बना लिया था। जिसके बाद वहां से भारतीय जवानों के शव वापस आए तो आटोप्सी रिपोर्ट से पता चला कि भारतीय सैनिकों के साथ पाकिस्तान ने कितनी बेरहमी की थी।पाकिस्तान की सेना ने हमारे देश के जवानों को सिगरेट से जलाया था। उनके कानों में लोहे की सुलगती छड़े डाली गई थी उनकी आंखें निकाल ली गई थी। उनके अधिकार दांत और हड्डियां तोड़ दी थी। मारा-पीटा यहां तक कि उनके शरीर के अंग भी काट दिए गए थे सैनिकों को मानसिक और शारीरिक रूप से टॉर्चर भी किया गया था सौरव कालिया उनके 5 साथी थे। यह सब दुश्मन के हाथों पकड़े गए थे 20 से ज्यादा दिनों तक हमारे सैनिकों को जबरदस्ती पाकिस्तानी सेना ने तड़फाया था।सौरभ कालिया की उम्र उस वक्त 22 साल थी।और उनके साथ जवान अर्जुन राम की उम्र 18 साल सौरव कालिया बटालिक में 5 जवानों के अपने टुकड़े के साथ गश्त पर थे। गश्त के दौरान ही पाकिस्तानी घुसपैठियों ने उन्हें पकड़ लिया था। अब हर पाकिस्तान द्वारा पकड़े गए भारतीय सैनिकों के किस्मत एक जैसी नहीं होती इस मामले में अभिनंदन कुछ इन सबसे अलग रहे यह हमारे लिए खुशी की बात है।

विंग कमांडर अभिनंदन का एटीट्यूड और पाकिस्तान की सेना के साथ गर्मजोशी के जवाब तलब उनकी ट्रेनिंग 
का हिस्सा है।और यह ट्रेनिंग हर वायु सैनिक को या भारत के किसी भी सेना के जवान को दिया जाती है। कि दुश्मन की गिरफ्त में होने के बावजूद उसे क्या करना चाहिए।

अभिनंदन ने यहां पर अदम्य बहादुरी दिखाई वो चाहते तो वहां से वापस हो सकते थे F-16 तो भाग ही रहा था 
बाकी नौ की तरह।लेकिन उन्होंने उसका पीछा किया और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में घुस गये. उन्होंने तय कर लिया कि इस F-16 को मार गिराना है।बरसों पुराने उड़ते ताबूत मिग 21 को लेकर अभिनंदन ने वापस लौटने के बजाय आधुनिक पाकिस्तानी F-16 को पाकिस्तान अधिकृत एरिया में घुसकर मारने का तय कर लिया! उसे मार गिराने के बाद अभिनंदन ने एक बहुत ही खतरनाक हाई जी बैरल रोल परफॉर्म किया. पाकिस्तान से भी हैवी फायरिंग शुरू हो गई थी, इसकी वजह से उन्हें अपने मिग 21 से ये खतरनाक एक्शन कराना पड़ा लेकिन ये करते हुए वो बहुत ऊपर चले गए क्योंकि उन्हें वापस इंडिया की तरफ मुड़ना था. लेकिन ये करते हुए मिग 21 का पुराना इंजन कुछ देर के लिए हैंग हो गया और पाकिस्तान की फायरिंग ने हिट  कर दिया।इसके बाद उन्हें पाकिस्तान में लैंड करना पड़ा. इसके आगे की कहानी हम सबको पता चली।

अभिनंदन ने वाकई बेहद बहादुरी का काम किया है. अभिनंदन ने ये रोना नहीं रोया कि मिग 21 है, क्या 
साहस रहा होगा कि सेकंड्स में मिग 21 लेकर हवा में पहुंचे और पीछा कर एक अत्याधुनिक लड़ाकू विमान को मार गिराया। पाकिस्तान में खुद गिर जाने के बाद उसी साहस से पाकिस्तान का सामना किया. अभिनंदन इसलिए अभिनंदन हैं।

पाकिस्तान के चश्मदीद लोगों ने दावा किया था! कि हमने आसमान में से दो पैरासूट गिरती हुई देखी थी जिसमें 
भारत के दो पायलट थे असल में वह दूसरा पायलट भारत का नहीं पाकिस्तान का था और जो आज इस वक्त इस दुनिया में नहीं है! जानकारी के मुताबिक एफ-16 फाइटर जेट क्रैश होने के बाद पायलट शहाजुद्दीन इजेक्ट हो गए थे और एलओसी के नौशेरा सेक्टर में जा पहुंचे। जमीन पर उतरने के बाद लोगों को लगा की वह भारतीय पायलट हैं और उन्हे पीट-पीटकर मार डाला।

लंदन में रह रहे उनके परिचित वकील खालिद उमर ने अपनी फेसबुक पोस्ट में इस बात का दावा किया। 
उन्होंने लिखा कि उन्हें घायल अवस्था में अस्पताल ले जाया गया था, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। इस दावे को पाकिस्तान का वह बयान भी पुख्ता करता है, जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान ने भारत के दो पायलेट पकड़े हैं, जिनमें एक (अभिनंदन) हिरासत में है! और दूसरा अस्पताल में उपचाराधीन है। जबकि बाद में सिर्फ एक भारतीय अभिनंदन की पुष्टि हुई और दूसरे पायलेट की बात कहीं दब गई। अब पता चल रहा है कि दूसरा पायलेट पाकिस्तानी था, जिसकी मौत हो गई।

अभिनंदन हमारा हीरो है उनके अदम्य साहस को सैल्यूट!



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