आज बाल दिवस दिवस हैं फिर अनेक सरकारी- गैर सरकारी आयोजन होंगे । स्कूलों में पिछले वर्षों की भांति कई कार्यक्रमों का आयोजन होगा, ढेरों बातें होंगी, बच्चों की भलाई के लिए ढेर सारे वादे किये जायेंगे, तालियां बजेंगी, मीडिया में तमाम ख़बरें होंगी । इस साल ये सब कुछ थोड़ा ज्यादा और जुदा भी होगा क्यों कि बच्चों की बेहतरी के लिए समर्पित दो शख्सियतों, सत्यार्थी व मलाला को नोबल शांति पुरस्कार जो मिला है । हां, आजाद भारत के पहले प्रधान मंत्री और बच्चों के चाचा नेहरू के जन्म दिन के उपलक्ष्य में भी अनेक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे । बस और क्या ?
ज़रा सोचिये, इस मौके पर पूरे देश में जितने रूपये सारे सरकारी –गैर सरकारी आयोजनों में खर्च होंगे तथा खर्च हुए दिखाए जायेंगे, उतनी भी राशि अगर कुछ गरीब, बेसहारा, कुपोषित बच्चों के भलाई के लिए कुछ बेहद पिछड़े गांवों में खर्च किये जाएं तो बच्चों का कुछ तो भला होगा




