इंसान का घर भले ही खाली रह जाये! घर की अलमारी बेशक खाली रह जाये,लेकिन इंसान को अंदर से खाली नहीं रहना चाहिए। सत्य,निष्ठां,उच्च संस्कार व् उदार गुणों से परिपूर्ण रहना चाहिए। अगर घर,अलमारी भरकर इंसान खुद खाली रह गया तो समझो वो जिंदगी का दांव हार गया। वो अथाह खजाना किस काम का! जिसकी औलाद नशे में चूर होकर किसी अबला का चीर हरण करे? वो दौलत किस काम की! जिसके माँ-बाप बुढ़ापे में घर आने वाले की तरफ उम्मीद लगाकर देखे, कहते है वो पुरुषार्थ किस काम का! जो किसी और के चेहरे पर मुस्कान न ला सके आज चहुँ और बेईमान लोग सुख भोग रहे है व् सीधे लोग कष्ट। इसी को देखकर सीधे लोग भी रास्ता भटक रहे है। लेकिन यहाँ समझने वाली बात यह है कि बेईमान सुख की आड़ में पाप इकठ्ठा कर रहे है व् सीधे लोग कष्ट भोगकर पूण्य इकठ्ठा कर रहे है। इसलिए विचलित होने की कतई जरुरत नहीं है।सबको कर्मों का फल जरूर मिलेगा व् इसी जन्म में। साल में कम से कम एक पेड़ जरूर लगाये। महीने में कम से कम एक भूखे को खाना जरूर खिलाये। सप्ताह में एक प्यासे को पानी जरूर पिलाये।देखो चारों तरफ कैसे बदलाव की बयार बहेगी।कोई कर्म छोटा नहीं होता,बस आपका दिल बड़ा होना चाहिए। आपका दिल किसी का दिल जलाने के बजाय खिलाने के काम आना चाहिए।जीवन जीने का मकसद समझ लीजिये,सब कुछ अपने आप होता चला जायेगा। बिन बरसने वाले घने बादलों से बेहतर है छोटा ओउंस का झुण्ड,जो कम से कम एक झाड़ी की पत्तियों को गीली कर जाता है। जिंदगी भर भलाई करने का दिखावा करने वाले से बेहतर होते है उस राहगीर के चंद मिनट,जो घायल को समय पर अस्पताल पहुंचा दे। सबसे बड़े दानी होने की कोशिश करने वाले से बेहतर वो शिक्षक होता है जो निःशुल्क किसी गरीब के बच्चे को शिक्षा दे। इंसानियत की हत्या करके पैसों के ढेर पर बैठकर कभी सुख नहीं भोगा जा सकता।सुख अंदर से मिलता है। पैसो से खरीदने वालों की कोशिशें हमेशा नाकाम होती है। जिंदगी को जीना चाहिए।जिंदगी के दिन तो हर कोई काट ही रहा है।उदार बनकर जियो।सेवाभावी बनकर जियो।
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