पेशावर की आर्मी स्कूल में नर पिशाच

पेशावर की आर्मी स्कूल में नर पिशाच दरिंदो ने वो कर दिया जिसकी कल्पना मात्र से इंसानियत मर जाये।सुबह  हँसता हुआ बालक जिस दरवाजे से दाखिल हुआ उसी दरवाजे से दोपहर को ताबूत के रूप में बाहर निकला। जिस माँ ने सुबह कलेजे के टुकड़े को सजाकर तालीम लेने भेजा,दोपहर में हाथ में ताबूत के रूप में थमा दिया।जिस बालक को दुनिया की दहलीज पर कदम रखने में 20 साल लग जाते है उसी समय को 20 सेकंड में तब्दील कर दिया। सारी दुनियां के हुक्मरान बाहर आये,निंदा की,हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया और वापिस ऑफिसों में चले गए।कुछ को यह कम लगा तो मियां नवाज को फोन लगा दिया।हो गई रश्म-अदायगी! पाकिस्तान को खुद पता है इस बीमारी के कारण व् निवारण के उपाय।लेकिन बात अच्छे व् बुरे आतंकवाद के बीच फंस जाती है।बात राजनीतिक,सैन्य व् आतंकवादी आकाओं की ताकत की नुमाइश के बीच फंस जाती है।

दुनिया में जितनी धर्म व् जातियां है उससे ज्यादा इस मुल्क में आतंकवादी गुट है।सबसे बड़ा कौन व् आपसी 
लड़ाई में इन मासूमों का कत्लेआम किया गया। ऐसा नहीं है कि दुनियाभर के हुक्मरान पहली बार एकजुटता दिखा रहे है।नाइजीरिया में बोको हरम ने 200 मासूम बच्चियों का अपहरण किया था तब भी इन लोगों ने निंदा आदि से क्रियाकर्म किया था।क्या हुआ इन बच्चियों का कोई नहीं जानता!बगदादी किस प्रकार मानवता का चीरहरण कर रहा है?सबको पता है।स्कूल तबाह,घर तबाह,सब कुछ तबाह।छोटी छोटी लड़कियों को हार्मोन के इंजेक्शन लगाकर हवस के भूखे  भेड़ियों को बेच रहे है।खरीदने वाले भी कोई कम दरिंदे नहीं होते।लेकिन क्या करे जनाब! दुनिया वालों ने इसे भी एक धँधा बना लिया।गन्दा है लेकिन धंधा है जनाब,करना पड़ता है।  अरब देशों की अनिश्चितताओं में ही अमेरिकी तेल कंपनियों को फायदा होता है। जहाँ इनके  हितों की अनदेखी होती है वहीं दो चार हवाई हमले कर दिए जाते है।ओसामा अमेरिका की बोई हुई फसल थी जिसे काटा भी गया तो बेढंग से।खाद पानी भी तो ये ही देश देते है।कुछ कमी ड्रग्स के कारोबार से पूरी कर लेते है।चंदे का कारोबार भी कम नहीं है।जब चारोँ ओर अंधेरगर्दी नजर आये तो इससे निपटा कैसे जाये? कहते है कि कुछ समस्या खुद ही अपना समाधान ढूंढ लेती है।जिन कर्मों से ये चरम पर पहुंचे है वो ही कर्म चुपचाप इनको जमींदोज कर देंगे।मुझे उस बच्चे की बात में दम नजर आया जिसने कहा कि मेरा बस चला तो इन दरिंदो की दुनियां ख़त्म कर दूंगा,इनकी नस्लें ख़त्म कर दूंगा।जब तक आम नागरिक इक्कट्ठे होकर इनके खिलाफ बन्दूक नहीं उठा लेते तब तक ये दरिंदे अपने कारनामों से बाज नहीं आएंगे।जब सत्ता असहाय हो तब जनता नई राह दिखाती है।हर माँ बाप को अपने युवा खून पर नजर रखनी होगी।जब बेटा रास्ता भटके तब खुद ही कब्रिस्तान पहुँचाना होगा।ताकि ऐसे दरिंदे फिर अपनी माँ की कोख पर कालिख पोतने की हिम्मत ना जुटा सके। इस्लामिक नेताओं व् धर्मगुरुओं को आगे आना होगा।आग आपके घर में लगी हुई है,बुझाने कोई ओर क्यों आएगा? और ऐसे समय जब आप ख़ामोशी से नजारा देखते रहोगे!आपको समझना होगा हर तरह का आतंकवाद बुरा होता है।आपको समझना होगा कि 21वीं सदी में जिहाद के लिए कोई जगह नहीं है।ये गरीब लोग थे,ये अनपढ़ लोग थे,ये भटके हुए युवा है,आदि तर्कों से सहानुभूति जताकर इन दरिंदो की हौंसला अफजाई बंद होनी चाहिए।
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