गर्व नौकरों पर या नेतृत्वकर्ता पर

कल शाम को यूपीएससी के भारतीय प्रशासनिक सेवा के नतीजे आये और तमाम बहुजन समाज की जातियों के लोग अपनी-अपनी जाति के सफल युवाओं को बधाइयां दे रहे है और इनके माध्यम से जातीय गौरव का उभार दिखा रहे है।अच्छा हुआ बेरोजगार थे और रोजगार मिल गया!अच्छा हुआ नेतृत्व करने की क्षमता नहीं थी इसलिए नौकर बन गए!अच्छा हुआ गरीब युवा को घर संभालने का अवसर मिल गया मगर इनसे समाज,देश,गरीब, मजलूम के फेवर में क्रांति की उम्मीद कभी मत पालियेगा।दुग्ध क्रांति लाने वाले पीजे कुरियन,हरित क्रांति लाने वाले स्वामीनाथन,टेलीकॉम क्रांति लाने वाले पित्रोदा,देश को मिसाइल व परमाणु से लैस करने वाले कलाम ये कभी नहीं बन सकते!
किसान-कमेरों की आवाज बनने वाले चौधरी छोटूराम,दलित-पिछड़ों की कलम बनने वाले भीमराव अंबेडकर,बहुजन समाज को कलम थमाने वाले ज्योतिबा फुले,पाखंड व अंधविश्वास की बेड़ियों को उतारने वाले पेरियार ये कभी नहीं बन सकते!न ये कृषि को मुनाफे में बदलने के तरीके बताने वाले चौधरी चरणसिंह बन सकते है और न ये बहुजन समाज को जगाकर सत्ता की चाबी बताने वाले कांशीराम बन सकते है!
मैं मेरे अनुभव व अध्ययन के बल पर दावे के साथ कहता हूँ कि जिस कच्चे मकान में बैठकर, जिस झोंपडी में बैठकर इन्होंने पढ़ाई की होगी उसकी लीपापोती तो दूर खंडहर बन जायेगी और ये बड़े बाबू बनकर शहरों में शिफ्ट हो जाएंगे।गांवों की मिट्टी की खुशबू से हासिल तरक्की से ये शहरों की सड़कों के बराबर की टाइल्स हर साल बदलते नजर आएंगे मगर जिस गांव की सरकारी स्कूल से इन्होंने शुरुआत की उस स्कूल को खंडहर में बदलते देख मुस्करायेंगे कि कब गिरे और कब मेरी पत्नी/मेरे पति के नाम निजी स्कूल खोलूं!
इस देश को सबसे ज्यादा आईएएस व आईपीएस कोसी नदी के किनारे वाले बिहार ने दिए है मगर ये हजारों आईएएस/आईपीएस मिलकर उस क्षेत्र में शिक्षा,चिकित्सा,रोटी,कपड़ा व मकान की व्यवस्था नहीं कर पाएं!जब भी किसी गांव से कोई प्रशासनिक अधिकारी बनता है तो उसकी मेहनत को देखकर मैं भी भावुक हो जाता हूँ व उसको सलाम करता हूँ मगर फिर दूसरा पहलू सोचकर व्यथित हो जाता हूँ कि मेरे गांव की मेहनत इस देश का सिस्टम,इस देश का भावुक समाज शहर में शिफ्ट करने में कामयाब हो गया!
अंग्रेजों के जमाने मे फाइल्स की नोटिंग/ड्राफ्टिंग करने के लिए अखिल भारतीय स्तर पर इस सेवा की स्थापना की गई थी मगर काले अंग्रेज सत्ता पर काबिज हुए तब इस सेवा में बदलाव करने/खत्म करके राज्यों को सौंपने के बजाय इन्होंने भी हूबहू जारी रखा।देश के मेहनती बच्चों/नवाचार पैदा करने की प्रतिभाओं को इन फाइल्स में रौंदकर रख दिया।सर्विस रूल्स ऐसे कि इंसान के बजाय नोटिंग/ड्राफ्टिंग करने के कंप्यूटर/फोटो कॉपी की मशीन की तरह बना दिये जाते है।खुलकर कहता हूँ कि यह सेवा देश की प्रतिभाओं का बूचड़खाना बन चुकी है।
अगर गर्व करना है तो बेहतर खेती करने वाले किसान पर करो,अगर गर्व करना है तो बेहतर कारीगरी करने वाले मजदूर पर करो,अगर गर्व करना है तो गाय-भैंस पालकर डेयरी खोलने वाली बहनों पर करो,अगर गर्व करना है कॉलेजों-विश्विद्यालयों में कमजोर छात्रों की लड़ाई लड़ने वाले छात्र-नेताओं पर करो,अगर गर्व करना है तो समाज की गरीबी,बेरोजगारी,अशिक्षा,भुखमरी,प्यास के मुद्दों को लेकर सत्ता से संघर्ष करने वाले लोगों पर करो!फिर देखना कैसे समाज मे रेडिकल बदलाव आते है!गर्व नौकरों पर नहीं,नेतृत्वकर्ताओं पर करना चाहिए।
हमे गर्व PURA अर्थात Providing urban amenities in rural area सरीखे रोडमैप देने वाले अब्दुल कलाम पर करना चाहिए, हमे गर्व बाड़मेर में ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान के माध्यम से हजारों महिलाओं का हस्तशिल्प के क्षेत्र में नेतृत्व करने वाली बहन रूमादेवी पर करना चाहिए ताकि हमारा ग्रामीण भारत मजबूत हो,सशक्त हो,स्वावलंबी हो।


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

Popular Posts