खेती के लिए पैरोल!

अजब का मेरा देश है गजब का इसका तंत्र!जिस दरिंदे को जेल भेजने के लिए पंचकुला की सड़कें लाल हुई व सेंकडों लोग मारे गए वो दरिंदा खेती के लिए पैरोल मांग रहा है व सरकारी अधिकारी इनका आवेदन आगे बढ़ा रहे है।

मसला यह नहीं है कि बाबा का खेती से क्या तालुक है?मसला यह भी नहीं है एक अपराधी ने पैरोल मांगी है!असल मसला यह है कि चुनावी मानसून से पहले वोटों की खेती के लिए सरकार कितना गिरेगी?

यह आवेदन मीडिया में जारी करना यह साबित करता है कि सरकार स्थिर पानी मे पत्थर फेंक रही है और देख रही है कि लहरें कितनी ऊपर उठ रही है!

हमारी संवेदनाओं,जागरूकता को टेस्ट किया जा रहा है।अगर प्रतिक्रिया सहज रही तो अपराधी को छोड़कर डेरा लुच्चा सौदा के अंधभक्तों को खुश करके वोट लेने के लिए बाबा को पैरोल दी जा सकती है!

यह हमारे हुक्मरानों व सत्ता की सोच है!सजायाफ्ता दरिंदो से भी कुर्सी के लिए समझौते को आतुर लोग क्या समाज-देश का भला करेंगे?

अगर गुरमीत को खेती के लिए पैरोल दे रहे हो तो आशाराम को सूड़ करने के लिए,हनिप्रीत को दोपहरी का खाना ले जाने के लिए व जितने भी ढोंगी जेलों में है उनको मेंढ़क-मेंढकी की शादी के लिए पैरोल दे दो ताकि अच्छी बारिश करवाकर पूरी फसल ले सके!

हाँ, दिल्ली में ईश्वरीय विश्वविद्यालय चलाकर गोपियों का सुख भोगने व लड़कियों की सप्लाई करने वाले वीरेंद्र देव दीक्षित को भी ढूंढ लाओ बरसाती मौसम में इंद्र की परियाँ नचायेगा तभी तो खेतों में स्वर्ग नजर आयेगा!

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