जिनका अपना कोई इतिहास नहीं होता है वो खुद का इतिहास रचने में इतने उतावले रहते है कि सत्ता में होते हुए खुद को ही इतिहास बनाने के काम करने लग जाते है।जिनका ठीकठाक इतिहास नहीं होता उन लोगों को हर ऐतिहासिक घटना,युद्ध,स्थापत्य कला व निर्मित भवनों से नफरत सी होने लग जाती है!ऐसे लोगों के हाथों में कलम आ जाती है व साथ मे सत्ता मिल जाये तो इनके क्या कहने!भले ही 90साल में निक्कर से पेंट पहनना सीखे हो लेकिन शाखाओं में बैठकर नफरत का ऐसा गुब्बार तैयार कर डाला कि इनका एक भी सांसद/विधायक इतिहास के बारे में बोल देता है तो टूट पड़ते है वानर सेना की तरह!
जितना ज्ञान इतिहास का रामायण वाले ये पोंगे-पंडित जानते है उतना ही इतिहास ये संघी लोग जानते है।इनके इतिहास की जानकारी देखकर मुझे इन लोगों की बुद्धि व समझ पर तरस आता है!अगर जानकारी नहीं हो तो किसी से लेने में क्या दिक्कत है?मेरे जैसा भावुक आदमी आपको मुफ्त में जानकारी दे देगा!मुझे पता है कि शाखाओं में हवा में लठ लहराना व काल्पनिक कहानियां रचना व उसका प्रचार प्रसार करना सिखाया जाता है!विज्ञान,बुद्धि,तर्क, तथ्यों से इनको कोई लेना देना नहीं होता है।एक बार योगीजी का इंटरव्यू देख रहा था।योगीजी बता रहे थे कि ताजमहल हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है।सभी सुविधजनक प्राचीन राजाओं को हिन्दू हृदय सम्राट घोषित किया जा रहा है व मुस्लिम राजाओं को देश का गद्दार घोषित किया जा रहा है।
इनके लॉजिक को देखे तो जो युद्ध मुस्लिम राजाओं बनाम अन्य के बीच मे हुए उनमें मुस्लिम राजाओं को गद्दार व संस्कृति के विरुद्ध बता रहे है व अन्य राजाओं को हिन्दू धर्म के रक्षक/हिन्दू हृदय सम्राट घोषित करने में लगे है।इन इतिहास के फैल संघी विद्यार्थियों को कुछ उदाहरणों के माध्यम से इतिहास की जानकारी देना चाहता हूँ।मौर्य सम्राट अशोक ने कलिंग के युद्ध मे 2लाख लोगों को मारा था।बताइए वो 2लाख लोग कौन थे?अशोक आपके लॉजिक के हिसाब से एन्टी हिन्दू है या हिन्दू?मराठाओं ने 1740में बंगाल पर आक्रमण किया था और 4लाख हिन्दू लोगों को मार डाला था तो मारने वाले कौन थे? मराठा एंटी हिदू थे या हिन्दू?4लाख हिंदुओं को मारा ही नहीं था बल्कि सैंकड़ों मंदिरो को लूटा था।तो क्या यह लड़ाई धर्म की लड़ाई मानी जाए?आपकी शाखा वाली भड़ास क्या कहती है वो आप सोच लीजिये!
ये इतिहास के फैल विद्यार्थी 1782 के अंग्रेज बनाम टीपू सुल्तान के युद्ध को भूलकर टीपू सुल्तान को कर्नाटक चुनावों में खलनायक के तौर पर पर पेश कर रहे है।मैं इनको पूछना चाहता हूँ कि हैदर अली व टीपू के खिलाफ अंग्रेजों के साथ कौन खड़ा हुआ था?जब 1791में टीपू के साथ मराठा युद्ध हार गए थे तब वापिस लौटते वक्त रंगनाथ मंदिर को मराठाओं ने जमकर लुटा ही नहीं बल्कि जमकर तोड़फोड़ की थी!शंकराचार्य ने टीपू सुल्तान को चिट्ठी लिखकर बताया कि मराठाओं ने मंदिर लूट लिया है और आप राजा है मदद कीजिये।टीपू सुल्तान ने न केवल उस मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया बल्कि जितना माल लुटा गया उसकी भरपाई की थी!क्या संघी लोग यह बता सकते है जिन मराठाओं को आप हिन्दू हृदय सम्राट बता रहे हो वो एंटी हिन्दू थे या हिन्दू?आपकी सुविधा के लिए बता दूं कि मराठाओं की सेनाओं के खिलाफ लड़ रही टीपू सुल्तान की सेना का सेनापति रंगा था व टीपू सुल्तान का खजांची कृष्णा राव था।ये हिन्दू थे।
हल्दी घाटी का 1576में जो युद्ध हुआ था उसमें हिन्दू राजा राणा प्रताप की सेना का सेनापति मीर हाकिम खान कौन था!मुस्लिम राजा अकबर की सेना का सेनापति मानसिंह कौन था?क्या यह युद्ध हिन्दू बनाम मुस्लिम था?कतई नहीं।यह युद्ध सत्ता के लिए व प्रजा पर कब्जे का युद्ध था।महाराष्ट्र में चुनाव आते है तो छत्रपति शिवाजी महाराज को हिन्दू आइकॉन बनाकर हिन्दू-मुसलमान करते है।हिन्दू राजा शिवाजी की सेना का कमांडर इन चीफ इब्राहिम खान कौन था?शिवाजी महाराज का अंगरक्षक सिद्धि इब्राहिम कौन था?मैं इन सारे उदाहरणों के माध्यम से बताना चाहता हूँ कि पहले जो भी युद्ध हुए थे वो सत्ता व प्रजा के मद्देनजर हुए थे।चंद्रगुप्त मौर्य ने तजाकिस्तान तक आक्रमण किये।अशोक मौर्य ने अफगानिस्तान तक आक्रमण किये व कब्जा किया।शक,हूण, कुषाण, ऐबक,गौरी,मुग़ल आदि सब अनिर्धारित सीमाओं के इसी मैदान में राज करके गए है।आप खुद सोचिए कि मुहम्मद गौरी को पृथ्वी राज के खिलाफ किसने युद्ध करने के लिए न्यौता दिया व 1192 में तराइन के युद्ध के समय जयचंद गहड़वाल जैसे हिन्दू राजा क्या कर रहे थे जब एक मुस्लिम हिंदुओं पर अत्याचार कर रहा था!ऐसा नहीं था कि मुस्लिमों व हिंदुओं के बीच ही युद्ध हुए हो!अफगानी मुस्लिम शेरशाह सूरी ने मुगल बाबर के बेटे हुमायूं को 1540 में हराकर यहां से भगाया था और हुमायूं को राखी भेजने वाली महारानी के नाम से आज रक्षाबंधन बड़े शौक से मना रहे है!
पहले कोई अखंड भारत जैसा कांसेप्ट यहां था ही नहीं।सब छोटे-छोटे राजा आपस मे लड़ाइयां लड़ते थे व खेती आय का मुख्य स्रोत था इसलिए प्रजा पर कब्जे की लड़ाइयां लड़ते थे।अंग्रेजों ने श्रीलंका,बांग्लादेश,बर्मा, भारत,पाकिस्तान अफगानिस्तान आदि को एक करके 1833 में पहली बार इंडियन प्रोविंस नाम दिया था।तो पहले विश्वगुरु वाला अखंड भारत कहाँ था।अब ये शाखा वाले इतिहासकार बता रहे है कि हिंदुस्तान हिंदुओं का था और मुस्लिम बाहर से आये हुए लोग है।इनकी संस्कृति इस देश की संस्कृति का हिस्सा नहीं है तो मैं भी यह कह सकता हूँ कि शाखा चलाने वाले ब्राह्मण लोग भी बाहर से ही आये है तो इनके लॉजिक के हिसाब से इनकी संस्कृति भी इस देश का हिस्सा नहीं है!
यह देश दुनियाँ का ऐसा अनूठा देश है जिसमे हजारों संस्कृतियों के समागम से भारतीय संस्कृति बनती है।ये बुद्धि के दुश्मन लोग सिर्फ नफरत फैला सकते है।जब ये मूर्ख इतिहासकार यह कहते है कि ताजमहल इस देश की संस्कृति का हिस्सा नहीं है तो फिर लाल किला भी मुगलों ने बनाया है।उसकी प्राचीर पर खड़े होकर क्यों भाषण झाड़ते हो?अंग्रेजों ने 200साल तक देश को लूटा है!संसद भी बाहरी अंग्रेजों ने बनाई है उसके अंदर बैठकर गर्व क्यों महसूस करते हो?राष्ट्रपति भवन भी अंग्रेजों ने ही बनाया है उसको भी छोड़ दीजिए!रेल भी अंग्रेजों ने चलाई थी वो भी बंद कर दीजिए!आपके बाप दादाओं ने काल्पनिक शास्त्र रचने के अलावा क्या किया था?सबकुछ छोड़कर उड़ाओ पुष्पक विमान! पढ़िए कामसूत्र ताकि श्राप रूपी क्रियाओं से कुंवारी के बच्चे पैदा होने लग जाये!आदमी के शरीर पर हाथी का सिर सेट करिये क्यों अंग्रेजो की एलोपैथी चिकित्सा वाले अस्पतालों को ढो रहे हो?
ये हिन्दू हृदय सम्राट सूरजमल,हिन्दू हृदय सम्राट शिवाजी, हिन्दू हृदय सम्राट राणा प्रताप आदि घोषित करके इनके समाज के बच्चों में जो नफरत के बीच बोये है उनकी फसल आज काटी जा रही है।एक भी बच्चा इन गद्दार पाखंडियों का सड़कों पर नहीं मिलेगा।नफरतों के सौदागर दंगेशाह बनकर बच्चों का किस तरह उपयोग कर रहे है वो देखिए!
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