उरी हमले में 17 जवानों की शहादत का कसूरवार कौन

उरी हमले के बाद जो देश की जनता का गुस्सा भड़का,जो आक्रोश फूटा उसका उपयोग मीडिया व् नेताओं ने जमकर किया।भारत सरकार लोगों की भावनाओं को सम्मान देने में नाकाम साबित हुई।जैसा पिछले 70 सालों से हर बड़ी घटना-समस्या के बाद तत्कालीन सरकारों का रुख रहा है,उससे जुदा मोदी सरकार भी नहीं निकली!जब देश की जनता में किसी घटना के बाद राष्ट्रीयता की भावना उबाल पर हो तो सरकार को कुछ तत्काल फैसले लेकर उन भावनाओं को जिन्दा रखने की कोशिश करनी चाहिए।सारी पुरानी नीतियां,घाटे-नफे के आकलन के बिना फैसले लेने चाहिए।नैतिकता का चोला ऐसे मौकों पर खूंटी में टांग देना चाहिए।विश्व बिरादरी का ख्याल रखने के बजाय अपने नागरिकों की भावनाओं का ख्याल रखा जाना चाहिए।पाकिस्तान ने आतंकी विश्व-बिरादरी को पूछकर थोड़े ही भेजे थे जो हम स्वरक्षा का फैसला विश्व-बिरादरी को पूछ कर करे!36 घंटे में तो आतंकी ऑपरेशन ख़त्म कर पाए!जैसे क्रिकेट मैच चल रहा हो भारत-पाक के बीच व् देश की जनता टीवी पर दर्शक बनकर बैठी हो!ज्यादादार सैनिक आतंकियों की गोली के बजाय टेंटों में लगी आग से जलकर शहीद हो गए!आर्मी बेस तक में जवानों को टेंटों में रात गुजारनी पड़ती है,इससे शर्मनाक इस देश के लिए क्या होगा?फिर भी देश की जनता एक सुर में आपके साथ खड़ी हुई लेकिन उनके राष्ट्रीय प्रेम की भावना का क़त्ल कर दिया।एक तरफ जवान आतंकियों से लड़ रहे थे दूसरी तरफ लुटियन जोन में उठक-बैठक चला रहे थे।जवानों ने अपना काम 100%कर दिया लेकिन दो दिन की उछल-कूद व् मीटिंगों के नाटक रचने के बाद क्या निर्णय लिया गया इससे देश को अवगत ही नहीं करवाया!देश की जनता की भावना व् भरोसे को ठन्डे बस्ते में डालना उतना आसान नहीं है जितना आप समझ बैठे है।इसका खामियाजा आपको व् इस देश को दशकों तक उठाना पड़ेगा। दिल्ली आतंकी हमले के बाद ड्रेस बदल-बदलकर कड़े क़दमों से लड़खड़ाने वाले तत्कालीन गृहमंत्री को कुर्सी छोड़कर भागना पड़ा था।कड़े शब्दों में निन्दा,मुंहतोड़ जवाब,डटकर मुकाबला आदि रटे-रटाये तोतावाणी से जनता आजिज आ चुकी है।पड़ोस में आतंक की फैक्ट्री है,पाकिस्तान आतंकी देश है जैसे नए जुमले मात्र रचने से काम नहीं चलेगा।पाकिस्तान को आतंकी देश घोषित करवाने की कोशिश करेंगे!कैसे होगी कोशिश?जब मुंह उठाकर देश से बाहर निकलों तो पहले अपने गिरेबान में जरूर झांकना! जब किसी देश को आतंकी देश घोषित करवाना चाहते हो तो पहले निम्न बाते ध्यान में रखना

1)पहले खुद पाकिस्तान को मित्र देश की सूची से हटाकर दुश्मन देश घोषित करो


2)सब तरह के व्यापारिक रिश्ते ख़त्म करो


3)सब तरह के राजनयिक सम्बन्ध ख़त्म करो


4)दोनों देशों के बीच हुई अंतरराष्ट्रीय संधियां ख़त्म करो


5)सबसे महत्वपूर्ण सिंधु जल संधि को ख़त्म करो।20%पानी खुद रखकर 80%पानी पाकिस्तान को देना कहाँ 

उचित है?यह संधि ख़त्म होते ही 3महीनों में पाकिस्तान घुटनो के बल भीख मांगने आ जायेगा। 
ये निर्णय कल ही हो जाने चाहिए थे।तुरंत कार्यवाही के रूप में।कोई भी समझदार नागरिक यह नहीं कहता कि सीधे युद्ध की घोषणा कर दो लेकिन दुश्मन बौखलाहट में आकर इस तरफ न बढ़ जाए इसलिए तैयारियां इस तरफ भी हो जानी चाहिए।हथियार नेताओं की कब्रों पर सजाने के लिए नहीं रखे है!उनको सीमा पर तैनात करके दबाव तो बनाया ही जा सकता है।हमले के बाद तुरंत जो प्रतिक्रिया दी जाती है उसमें दुनियां भी आपके साथ खड़ी रहती है।चार दिन बाद जब इस तरह के निर्णय लोगे तो कई देश आपको नैतिकता व् न्याय के उपदेश देने लग जायेंगे।26/11 के बाद हमारे पास मौका था लेकिन हमने गँवा दिया।अब सैनिकों की मौतों के बाद फिर गेंद आपके पाले में आई है।इस मौके से मत चूको।बार-चूके को दुनियां ही चूका हुआ मान लेगी।आप पर कोई देश भरोसा नहीं करेगा।कोई आपकी बात को गंभीरता से नहीं लेगा।न दुनिया के दूसरे देश और न इस देश की जनता।देश में निराशा का माहौल मत पैदा कीजिये।सेना का मनोबल मत तोड़िये ! उठिये!चीर निद्रा से जागिये!बंदरों वाली उछल-कूद से आगे बढिये!बयानबाजी के बजाय ठोस निर्णय लीजिये---


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