20जवानों की मौत के बाद अपंग हुए 20 पिता,20माता,20पत्नियों,20बहनों और 40बच्चों की भावनाओं,दुःख, लाचारी पर मैं अफसोस जाहिर करता हूँ।जनता की बेबसी व् लाचारी कल सुबह से हर माध्यम व् हर मंच पर प्रकट हो रही है।जब भी इस तरह की घटनाएं हुई है तब निशाने पर सत्ता रही है।जनता की नाराजगी-गुस्से की शिकार हमेशा सत्ता को ही होना चाहिए जो लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत होता है लेकिन कल से देख रहा हूँ कि जनता के गुस्से को तथाकथित देशभक्तों की फर्जी जमात देशद्रोही घोषित करने लग गई।सवाल पूछने पर गालियां दी जा रही है।गुस्सा प्रकट करने वाले को कठघरे में खड़ा किया जा रहा है। किसी ने अपना भाई खोया है,किसी के घर का चिराग उजड़ा है,किसी की मांग सुनी हो गई,किसी के सिर से बाप का साया उठ गया। उनके ऊपर क्या बीतती होगी,तुम क्या जानो नकली देशभक्तों?किसी का बेटा यह कहकर कश्मीर गया था कि बापू अगली बार छुट्टी आऊंगा तो आपके आँख का ऑपरेशन करवाऊंगा व् एक जोड़ी नई धोती लाकर दूंगा। किसी का भाई यह वादा करके गया हुआ था कि इस बार राखी पर नहीं आ पाउँगा लेकिन अगले रक्षाबंधन पर राखी जरूर बंधवाऊंगा।किसी का पत्ति झुग्गी की अँधेरी रात में फुसफुसाकर गया था कि अगली बार आऊंगा तो शादी की सालगिरह पर घूमने चलेंगे,किसी का बाप चूमते हुए बच्चों को कहकर गया था कि अगली बार आऊंगा तो तुम्हे नई साइकिल दिलवाऊंगा!जब उन सब अरमानों के मुखौटे को तिरंगे में लपेटकर उनकी चौखट पर सत्ता की नाकामी ने भेजा है तो क्या उम्मीद करोगे? एक जवान ही शहीद नहीं होता जनाब! पुरे कुनबे के अरमानों की हत्या होती है,उससे जुड़े हर रिश्ते का क़त्ल होता है,जिनके अपने अभी भी सीमा पर लड़ रहे है उनके दिलों में ख़ौफ़ पसर जाता है,हर फोन की घंटी परमाणु बम के धमाके से कम नहीं लगती,घर की तरफ आने वाला हर नया इंसान यमदूत का रूप नजर आने लगता है,घर की तरफ आने वाली हर गाडी की आवाज दहशत पैदा कर जाती है।जिंदगी भर बाप की सुनी धुंधलाती आँखे निहायत ही राह ताकती रहती है,घर में पैदा होती हर बारीक ध्वनि माँ को बेटे के आने की आहट याद दिलाकर तड़पा-तड़पाकर मारती है। अँधेरी रातोँ में हवा की सनसनाहट उसकी विधवा पत्नी की उम्मीदों-सपनो को जगा-जगाकर मारती है।उनके बच्चों को जिंदगी भर बाप का नाम पूछ-पूछकर अनाथ होने का अहसास दिलाते रहेंगे।हर फौजी वर्दी में जाते जवान को देखकर अपने बाप का अक्ष ढूंढता रहेगा वो बच्चा!जब भी राखी का दिन आएगा बहन की आँखों में ख़ुशी के बजाय अश्रुधारा बहेगी।त्यौहारों के दिन इनके घरों में खुशियों मनाने के बजाय लोग एक दूसरे के गले में लिपट-पटकर रोयेंगे!हर त्यौहार-उत्सव जिंदगी भर इनके घर में मातम लेकर आएगा। तुम्हे क्या मतलब इन दुखों के सागर से भरे इनके जीवन से!तुम्हे सत्ता सुख चाहिए न!तुम्हे लूटने का मौका चाहिए न!तुम्हे अपने झूठे धर्म के पाखंड का झंडा चाहिए न!तुम्हे अपने नेताओं की झूठी प्रशंसा चाहिए न!इस दुःख वाले समुद्र में खुद को रखकर सोचना!भावनाओं का क़त्ल करने से पहले दुबारा सोच लो कहीं भावनाओं को भड़काकर हासिल की गई सत्ता भावनाओं के सैलाब में डूबकर आत्महत्या न कर ले!हमारे सवाल व् हमारे द्वारा सत्ता की आलोचना ज्यादा ही नागवार लग रही है तो लुटियन जॉन में,जहाँ पर दो दिन से पेड़ों पर बंदरों की उछलकूद हो रही है,सीधे वहां पहुंचो और पूछो कि देश की सत्ता तुम्हे इसलिए नहीं सौंपी कि रोज तिरंगे में बांधकर सिपाहियों को उनके घर पहुंचाओ!सत्ता कड़े शब्दों वाली निन्दा के मोतियों से माला सजाने के लिए नहीं दी है! निर्णय लेने की ताकत भूल बैठे अपने आकाओं को बताओ कि गहरी संवेदना जताने के लिए 125करोड़ लोग है! दुनियां भर में घूम-घूमकर अपने नागरिकों की मौत की मार्केटिंग करने वालों को बताओ कि मुनाफा फ़ौज की बंदूक में है,मार्केट सीमा के उस पार है,100% निवेश व् 200%आमदनी बारूदी टैंको में है।बूढ़े-मृतप्राय पड़े लोगों को बताओं कि कलम उठाओ और कागज के टुकड़ों पर दस्तखत करके दो!समाधान बंदूक की नोक में है,समाधान टैंको की तोपों में है,समाधान लड़ाकू विमानों से गिरते गोलों में है। अमेरिका में जब हमला हुआ तो वो 20 मिनट चला था!यहाँ क्रिकेट मैच की तरह मुठभेड़ें चलती है।सिपाहियों को बिना लवाजमे के आतंकीयों की गोलियां के सामने खड़ा कर देते हो!जहाँ आतंकी हमला होता है वहां सीधे हवाई हमला क्यों नहीं करते? बड़े -बड़े हथियार क्या नेताओं की कब्रों पर सजाने के लिए बनाये है?गुस्सा आता है जनाब।जब अपनों की मौत होती है तो!गुस्सा आता है जब ताकत होते हुए भी इन नेताओं के दिमाग को लकवा मार जाता है!इस गुस्से को समझो और झेलने का माद्दा रखो।वतन से मोहब्बत करने वाले लोगों के दिलों में आग लगती है जब देश का नागरिक या जवान मरता है और नेता रटी-रटाई कड़ी निंदा का ठेला सजाकर बैठ जाते है.... इस गुस्से पर ऊँगली उठाने से पहले अपने बाप की आँखों में देखो,माँ के आँचल को देखो,पत्नी के चहरे को देखो,बच्चों के सपनों की मुस्कान को देखो और दो मिनट आँखे बंद करके सोचो कि मैं अब इस दुनियां में नहीं हूँ!दो मिनट में ही औकात पता चल जायेगी।
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