चीन ने ब्रह्मपुत्र नदी की सहायक नदी पर बाँध बनाकर पानी रोक दिया है। मसूद अजहर को आतंकी
घोषित करने के प्रस्ताव को वीटो कर दिया है। उरी अटैक के समय जो देशभक्तों की फ़ौज खड़ी हुई थी वो अभी आराम फरमा रही है व् दूसरी तरह की देशभक्तों की फ़ौज मैदान में आई है। दोनों के निशाने पर असल में किसान-कमेरे रहते है। जब उरी अटैक हुआ तो पहली प्रजाति चिल्ला रही थी कि पाकिस्तान को सबक सिखाओ! 18के बदले 80 मारो! मीडिया के सहयोग से यह प्रजाति देश को युद्ध में धकेलना चाहती है। अब सोचो युद्ध में कौन मरता है व किसको सबक मिलता है? वैसे इससे बेहतर परिणाम सरकारी बैंकों से 72000 करोड़ का कर्जा लेकर बिजली बनाकर पाकिस्तान को बेचने वाले अडानी को रोकने से मिल सकता है! पाकिस्तान का मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा समाप्त करने से मिल सकता है लेकिन करेंगे नहीं क्योंकि इससे भारतीय लुटेरे व्यापारी वर्ग को नुकसान हो जायेगा। सिंधु जल संधि तोड़ने से फायदा हो सकता है लेकिन तोड़ेंगे नहीं क्योंकि इससे किसानों को फायदा ज्यादा हो जायेगा ! लुटेरी सत्ता को यह मंजूर नहीं है।बांध बनाने में मजदूरों की बहुत जरूरत पड़ती है। पूंजी का बंटवारा नीचे तक हो जाता है। सरल भाषा में यह सब लिखने का मतलब यही है कि निर्णय हमेशा व्यापारी वर्ग के नफे-नुकसान के हिसाब से लिए जाते है और ऐसे निर्णय को दरकिनार करने के लिए बाकायदा मीडिया के सहयोग से माहौल पैदा किया जाता है।चीन विरोधी देशभक्तों की जो फ़ौज अभी प्रकट हो रही है वो थोड़ी अलग किस्म की है। ये लोग सबक सिखाने की बात नहीं करेंगे। बल प्रयोग की बात नहीं करेंगे।ये लोग चीन को आर्थिक नुकसान पहुंचाने की बात कर रहे है। असल में इनका मकसद चीन को आर्थिक नुकसान पहुंचाना नहीं खुद के व्यापार को बढ़ाना है। देख लो कोई भी चीज उठाकर जो चीनी कम्पनी 10 रूपए में दे रही है वो ही देशी कम्पनी 100रूपए में दे रही है। मतलब देशी लुटेरे आम जनता को ज्यादा लूट रहे है। वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ खड़ा होने के बाद देशी लुटेरों की लूट पर रोक लग गई। इसका तोड़ निकालने के लिए ये लोग नई किस्म की देशभक्ति का पेय आपको पिलाने की फ़िराक में है। किसी भी हालात में यह वर्ग नुकसान में नहीं रहना चाहता और शुरुआत भी हमसे ही करवाना चाहता है। अब चीनी माल की खरीद के बहिष्कार का आह्वान कर रहे है। गरीबों की देशभक्ति को भड़काकर चीनी माल न खरीदने की घुंटी पिला रहे है। अब गरीब मासूम लोग होते ही ऐसे है कि इन्होंने जो देशभक्ति की दवा दी है उसे ही असली दवा समझ बैठते है। एक छोटा सा तर्क भी दिमाग में जगह नहीं बना पायेगा कि भई मैं तो चीन का माल यहाँ ला नहीं रहा हूँ तो यहाँ तक आता कहाँ से है? यह ज्ञान अपने व्यापारी लुटेरे भाइयों को दो व देशभक्ति की यह घुंटी उनको क्यों नहीं पिलाते? हर किस्म की देशभक्ति सिर्फ गरीबों-मजदूरों-किसानों के हवाले ही क्यों करने में लगे हो? थोड़ी देशभक्ति अपने अंदर क्यों नहीं जगाते? जो देश भारत विरोधी है सबसे पहले उसके साथ व्यापारी लोग व्यापार बंद करे! नेता लोग उन देशों की यात्रा बंद करे! खुद मौज उड़ाए व् लूट को बनाये रखने के लिए गरीब लोग क़ुरबानी देते रहे! सवाल करो इन लुटेरों से! जवाब दो इस शोषक वर्ग को! हिसाब मांगों इन कुलीनों से!
घोषित करने के प्रस्ताव को वीटो कर दिया है। उरी अटैक के समय जो देशभक्तों की फ़ौज खड़ी हुई थी वो अभी आराम फरमा रही है व् दूसरी तरह की देशभक्तों की फ़ौज मैदान में आई है। दोनों के निशाने पर असल में किसान-कमेरे रहते है। जब उरी अटैक हुआ तो पहली प्रजाति चिल्ला रही थी कि पाकिस्तान को सबक सिखाओ! 18के बदले 80 मारो! मीडिया के सहयोग से यह प्रजाति देश को युद्ध में धकेलना चाहती है। अब सोचो युद्ध में कौन मरता है व किसको सबक मिलता है? वैसे इससे बेहतर परिणाम सरकारी बैंकों से 72000 करोड़ का कर्जा लेकर बिजली बनाकर पाकिस्तान को बेचने वाले अडानी को रोकने से मिल सकता है! पाकिस्तान का मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा समाप्त करने से मिल सकता है लेकिन करेंगे नहीं क्योंकि इससे भारतीय लुटेरे व्यापारी वर्ग को नुकसान हो जायेगा। सिंधु जल संधि तोड़ने से फायदा हो सकता है लेकिन तोड़ेंगे नहीं क्योंकि इससे किसानों को फायदा ज्यादा हो जायेगा ! लुटेरी सत्ता को यह मंजूर नहीं है।बांध बनाने में मजदूरों की बहुत जरूरत पड़ती है। पूंजी का बंटवारा नीचे तक हो जाता है। सरल भाषा में यह सब लिखने का मतलब यही है कि निर्णय हमेशा व्यापारी वर्ग के नफे-नुकसान के हिसाब से लिए जाते है और ऐसे निर्णय को दरकिनार करने के लिए बाकायदा मीडिया के सहयोग से माहौल पैदा किया जाता है।चीन विरोधी देशभक्तों की जो फ़ौज अभी प्रकट हो रही है वो थोड़ी अलग किस्म की है। ये लोग सबक सिखाने की बात नहीं करेंगे। बल प्रयोग की बात नहीं करेंगे।ये लोग चीन को आर्थिक नुकसान पहुंचाने की बात कर रहे है। असल में इनका मकसद चीन को आर्थिक नुकसान पहुंचाना नहीं खुद के व्यापार को बढ़ाना है। देख लो कोई भी चीज उठाकर जो चीनी कम्पनी 10 रूपए में दे रही है वो ही देशी कम्पनी 100रूपए में दे रही है। मतलब देशी लुटेरे आम जनता को ज्यादा लूट रहे है। वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ खड़ा होने के बाद देशी लुटेरों की लूट पर रोक लग गई। इसका तोड़ निकालने के लिए ये लोग नई किस्म की देशभक्ति का पेय आपको पिलाने की फ़िराक में है। किसी भी हालात में यह वर्ग नुकसान में नहीं रहना चाहता और शुरुआत भी हमसे ही करवाना चाहता है। अब चीनी माल की खरीद के बहिष्कार का आह्वान कर रहे है। गरीबों की देशभक्ति को भड़काकर चीनी माल न खरीदने की घुंटी पिला रहे है। अब गरीब मासूम लोग होते ही ऐसे है कि इन्होंने जो देशभक्ति की दवा दी है उसे ही असली दवा समझ बैठते है। एक छोटा सा तर्क भी दिमाग में जगह नहीं बना पायेगा कि भई मैं तो चीन का माल यहाँ ला नहीं रहा हूँ तो यहाँ तक आता कहाँ से है? यह ज्ञान अपने व्यापारी लुटेरे भाइयों को दो व देशभक्ति की यह घुंटी उनको क्यों नहीं पिलाते? हर किस्म की देशभक्ति सिर्फ गरीबों-मजदूरों-किसानों के हवाले ही क्यों करने में लगे हो? थोड़ी देशभक्ति अपने अंदर क्यों नहीं जगाते? जो देश भारत विरोधी है सबसे पहले उसके साथ व्यापारी लोग व्यापार बंद करे! नेता लोग उन देशों की यात्रा बंद करे! खुद मौज उड़ाए व् लूट को बनाये रखने के लिए गरीब लोग क़ुरबानी देते रहे! सवाल करो इन लुटेरों से! जवाब दो इस शोषक वर्ग को! हिसाब मांगों इन कुलीनों से!

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें