दिनभर की भागम-भाग की दिनचर्या के बाद रात 11बजे घर पहुंचा। डिनर के बाद तुरंत सोने
को चला गया। व्यक्तिगत सवाल-जवाब मेरी यात्रा का हिस्सा होते है। मैं यात्रा में होता हूँ तो
हर व्यक्ति के सवाल का जवाब देता हूँ लेकिन घर में प्रवेश करते ही सामने खड़ी तमाम
समस्याओ के बारे में चिंतन करने लग जाता हूँ।मैंने जिंदगी में कुछ प्राथमिकताएं तय कर रखी है
जिसका हर हाल में पालन करता हूँ।जो लोग निजी तौर पर मुझे जानते है उनको पता है कि मैं
कभी किसी के साथ मनभेद नहीं रखता।हर हाल में जाति, धर्म से परे मानवता मेरे लिए
सर्वोपरि है लेकिन मैं झूठ-छल-कपट के प्रति अति-प्रक्रियावादी हूँ,अतिसंवेदनशील हूँ। मैं हर
छोटी से लेकर बड़ी घटना पर एक नागरिक होने के नाते अपनी प्रतिक्रिया देता हूँ।
अभी रात एक बजे मेरे फोन की घंटी बजी और एक महिला के रोने की आवाज आ रही थी।
मेरी आधी निद्रा ही खुली थी।मैं कुछ समझ नहीं पा रहा था।यह इंसानी फितरत है।एकदम आप
दिनभर की थकान के बाद सोते हो तो चाहते हो कि सुबह इस समय उठेंगे व् आगे के ये-ये
काम करेंगे।लेकिन अचानक निजी फोन की घंटी बजे और दूसरी तरफ से किसी रोती हुई महिला
की आवाज सुनाई दे कि भाई मेरा सब कुछ ख़त्म हो गया!पति पागलों सा हो गया। कर्ज लेकर
20बीघा में जीरा बोया था।बेटी की शादी की तैयारियां कर चुके थे।फसल अच्छी थी। लेकिन
बरसात ने सबकुछ बर्बाद कर दिया।5तोला सोने की साई सुनार को दी थी बाकी के देने के
लिए पैसे नहीं है।बाकी इंतजाम होने की कोई उम्मीद नहीं है।अब तू ही बता कि मेरा आदमी
मरने जा रहा है,उसको मरने दूँ या मैं मरुँ?इज्जत व् सहानुभूति की चुनरियाँ भी मौत के बाद
ही मिलती है।उस दर्दभरी आवाज को सुनकर कांप रहा हूँ!नींद उड़ चुकी है!रात की दो बजे
बैठकर सोच रहा हूँ कि मैं तो अपराधी नहीं हूँ?किसान परिवार से निकलकर दिल्ली के लुटियन
जॉन के पास पहुंचना मेरा अपराध तो नहीं है?
आधी रात को बजी एक फोन की घंटी ने मेरे अंदर समाये बुद्धिजीविता के कीड़े को तार-तार
कर दिया।एक फोन की घंटी ने ताकतवर सरकार की सोच रखने वाले मुझ जैसे प्राणी के दिमाग
में लगी ज्ञानता की झंडी को आग लगा दी।एक घंटे की अफरा-तफरी के बाद सबकुछ ठीक हो
गया!मतलब मैनेज हो गया! लेकिन दिमाग की बत्ती बुझने का नाम नहीं ले रही है। क्या करे?
सब कुछ शांत होने के बाद मेरा दिमाग अशांत है।कुछ सवाल तूफान की तरह मेरे दिमाग में
उमड़ रहे है।
1.क्या किसी गाँव में सरपंच की बिना सहमति के कोई पटवारी या ग्रामसेवक गाँव के लोगों से
रिश्वत लेने की हिम्मत कर सकता है?
2.अगर भ्रष्टाचार गाँव के लोगों को परेशान कर रहा है तो पटवारी या ग्रामसेवक को पकड़ने के
बजाय सरपंच का गिरेबान क्यों न पकड़ा जाये?हमने सरपंच चुना है पटवारी या ग्रामसेवक नहीं!
3.अगर किसान की बीमित फसल बर्बाद हो गई तो किसान कैमरा,कागज,नकल,शपथ
पत्र,पटवारी-ग्रामसेवक के अप्रूवल लेने के लिए क्यों घूमे? बिमा कंपनी के कर्मचारी व् सरपंच
क्या लूट का माध्यम बनने के लिए नियुक्त किये गए है?
कुछ जगहों से आज खबरे आई कि मरीज की मौत के बाद डॉक्टरों की पिटाई!रिश्वत के आरोप
में आरआई गिरफ्तार,जनता ने कलेक्टर को काले झंडे दिखाए! तहसीलदार के साथ हाथापाई
की!थाने की गाड़ी पर पथराव किया गया!जनता से मेरा निवेदन है कि सरपंच की भूख के बिना
ग्राम-पंचायत में भ्रष्टाचार संभव नहीं है।विधायक की भूख के बिना तहसील-स्तर पर भ्रष्टाचार
मुमकिन नहीं है और सांसद की भूख के बिना संसदीय क्षेत्र में भ्रष्टाचार नहीं हो सकता।जब चाहे
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से आपके डॉक्टर को धमकाकर विदा कर दिया जाता है।एक गुंडे को
गिरफ्तार करने पर थानेदार का तबादला कर दिया जाता है!एक फोन कॉल पर आपका जिला
कलेक्टर जिला-बदर हो जाता है तो सोचो कि आपकी समस्याओं का असली गुनाहगार आपके
द्वारा चुना गया प्रतिनिधि ही है।
ग्राम-पंचायत स्तर की कोई समस्या हो तो सरपंच को तुरंत पकड़ो।या तो समाधान निकाले या
तुरंत इस्तीफा दे! समस्या तहसील स्तर की है तो विधायक महोदय को पकड़ो। बिना उनके
विधानसभा क्षेत्र में किसी भी तरह का भ्रष्टाचार-गुंडागर्दी संभव ही नहीं है। अगर ऐसा होता है
तो एकता बनाकर जूतों की माला पहनाने का कार्यक्रम रखो।जिलास्तर पर समस्याओं का समाधान
आपका सांसद करेगा।अगर आपके सामने समस्या है और उनका कोई समाधान नहीं निकल रहा
है तो सरपंच,पंचायत समिति सदस्य, प्रधान,विधायक,जिला परिषद सदस्य,जिला प्रमुख व् सांसद
के गिरेबान में हाथ डालो।आपके अधिकार में आपके ये ही जनप्रतिनिधि आते है और इनकी
भोकाल समझने व् ठीक करने की ताकत हासिल कर लोगे उस दिन लोकतंत्र सुधर जायेगा।
हंसी आती है यह लिखकर कि लोकतंत्र सुधर जायेगा😂😂😂जनता जूता पैरों में पहनने के साथ-साथ
हाथ में उठाना सीख जायेगी उसी दिन से लोकतंत्र लागू होना शुरू हो जायेगा।
को चला गया। व्यक्तिगत सवाल-जवाब मेरी यात्रा का हिस्सा होते है। मैं यात्रा में होता हूँ तो
हर व्यक्ति के सवाल का जवाब देता हूँ लेकिन घर में प्रवेश करते ही सामने खड़ी तमाम
समस्याओ के बारे में चिंतन करने लग जाता हूँ।मैंने जिंदगी में कुछ प्राथमिकताएं तय कर रखी है
जिसका हर हाल में पालन करता हूँ।जो लोग निजी तौर पर मुझे जानते है उनको पता है कि मैं
कभी किसी के साथ मनभेद नहीं रखता।हर हाल में जाति, धर्म से परे मानवता मेरे लिए
सर्वोपरि है लेकिन मैं झूठ-छल-कपट के प्रति अति-प्रक्रियावादी हूँ,अतिसंवेदनशील हूँ। मैं हर
छोटी से लेकर बड़ी घटना पर एक नागरिक होने के नाते अपनी प्रतिक्रिया देता हूँ।
अभी रात एक बजे मेरे फोन की घंटी बजी और एक महिला के रोने की आवाज आ रही थी।
मेरी आधी निद्रा ही खुली थी।मैं कुछ समझ नहीं पा रहा था।यह इंसानी फितरत है।एकदम आप
दिनभर की थकान के बाद सोते हो तो चाहते हो कि सुबह इस समय उठेंगे व् आगे के ये-ये
काम करेंगे।लेकिन अचानक निजी फोन की घंटी बजे और दूसरी तरफ से किसी रोती हुई महिला
की आवाज सुनाई दे कि भाई मेरा सब कुछ ख़त्म हो गया!पति पागलों सा हो गया। कर्ज लेकर
20बीघा में जीरा बोया था।बेटी की शादी की तैयारियां कर चुके थे।फसल अच्छी थी। लेकिन
बरसात ने सबकुछ बर्बाद कर दिया।5तोला सोने की साई सुनार को दी थी बाकी के देने के
लिए पैसे नहीं है।बाकी इंतजाम होने की कोई उम्मीद नहीं है।अब तू ही बता कि मेरा आदमी
मरने जा रहा है,उसको मरने दूँ या मैं मरुँ?इज्जत व् सहानुभूति की चुनरियाँ भी मौत के बाद
ही मिलती है।उस दर्दभरी आवाज को सुनकर कांप रहा हूँ!नींद उड़ चुकी है!रात की दो बजे
बैठकर सोच रहा हूँ कि मैं तो अपराधी नहीं हूँ?किसान परिवार से निकलकर दिल्ली के लुटियन
जॉन के पास पहुंचना मेरा अपराध तो नहीं है?
आधी रात को बजी एक फोन की घंटी ने मेरे अंदर समाये बुद्धिजीविता के कीड़े को तार-तार
कर दिया।एक फोन की घंटी ने ताकतवर सरकार की सोच रखने वाले मुझ जैसे प्राणी के दिमाग
में लगी ज्ञानता की झंडी को आग लगा दी।एक घंटे की अफरा-तफरी के बाद सबकुछ ठीक हो
गया!मतलब मैनेज हो गया! लेकिन दिमाग की बत्ती बुझने का नाम नहीं ले रही है। क्या करे?
सब कुछ शांत होने के बाद मेरा दिमाग अशांत है।कुछ सवाल तूफान की तरह मेरे दिमाग में
उमड़ रहे है।
1.क्या किसी गाँव में सरपंच की बिना सहमति के कोई पटवारी या ग्रामसेवक गाँव के लोगों से
रिश्वत लेने की हिम्मत कर सकता है?
2.अगर भ्रष्टाचार गाँव के लोगों को परेशान कर रहा है तो पटवारी या ग्रामसेवक को पकड़ने के
बजाय सरपंच का गिरेबान क्यों न पकड़ा जाये?हमने सरपंच चुना है पटवारी या ग्रामसेवक नहीं!
3.अगर किसान की बीमित फसल बर्बाद हो गई तो किसान कैमरा,कागज,नकल,शपथ
पत्र,पटवारी-ग्रामसेवक के अप्रूवल लेने के लिए क्यों घूमे? बिमा कंपनी के कर्मचारी व् सरपंच
क्या लूट का माध्यम बनने के लिए नियुक्त किये गए है?
कुछ जगहों से आज खबरे आई कि मरीज की मौत के बाद डॉक्टरों की पिटाई!रिश्वत के आरोप
में आरआई गिरफ्तार,जनता ने कलेक्टर को काले झंडे दिखाए! तहसीलदार के साथ हाथापाई
की!थाने की गाड़ी पर पथराव किया गया!जनता से मेरा निवेदन है कि सरपंच की भूख के बिना
ग्राम-पंचायत में भ्रष्टाचार संभव नहीं है।विधायक की भूख के बिना तहसील-स्तर पर भ्रष्टाचार
मुमकिन नहीं है और सांसद की भूख के बिना संसदीय क्षेत्र में भ्रष्टाचार नहीं हो सकता।जब चाहे
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से आपके डॉक्टर को धमकाकर विदा कर दिया जाता है।एक गुंडे को
गिरफ्तार करने पर थानेदार का तबादला कर दिया जाता है!एक फोन कॉल पर आपका जिला
कलेक्टर जिला-बदर हो जाता है तो सोचो कि आपकी समस्याओं का असली गुनाहगार आपके
द्वारा चुना गया प्रतिनिधि ही है।
ग्राम-पंचायत स्तर की कोई समस्या हो तो सरपंच को तुरंत पकड़ो।या तो समाधान निकाले या
तुरंत इस्तीफा दे! समस्या तहसील स्तर की है तो विधायक महोदय को पकड़ो। बिना उनके
विधानसभा क्षेत्र में किसी भी तरह का भ्रष्टाचार-गुंडागर्दी संभव ही नहीं है। अगर ऐसा होता है
तो एकता बनाकर जूतों की माला पहनाने का कार्यक्रम रखो।जिलास्तर पर समस्याओं का समाधान
आपका सांसद करेगा।अगर आपके सामने समस्या है और उनका कोई समाधान नहीं निकल रहा
है तो सरपंच,पंचायत समिति सदस्य, प्रधान,विधायक,जिला परिषद सदस्य,जिला प्रमुख व् सांसद
के गिरेबान में हाथ डालो।आपके अधिकार में आपके ये ही जनप्रतिनिधि आते है और इनकी
भोकाल समझने व् ठीक करने की ताकत हासिल कर लोगे उस दिन लोकतंत्र सुधर जायेगा।
हंसी आती है यह लिखकर कि लोकतंत्र सुधर जायेगा😂😂😂जनता जूता पैरों में पहनने के साथ-साथ
हाथ में उठाना सीख जायेगी उसी दिन से लोकतंत्र लागू होना शुरू हो जायेगा।
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