किसान सदियों से शोषित,पीड़ित ,वंचित रहा है लेकिन गौरों के जाने के बाद ऐसा लगा कि अब जिंदगी में उजलत के दिन आने वाले है!लेकिन थोड़ी बहुत तरक्की के नाम पर साहूकारों/महाजनों के ऋण के चंगुल से निकला तो बैंको के चंगुल में फंस गया।पूंजीवादी लुटेरों के सहयोगी बने ये बैंक सर्व सुलभ वित्त व्यवस्था का निर्माण करने के बजाय शोषण के प्रतीक बन गए।
उद्योगपत्तियों को हजारों करोड़ लोन के रूप में दिए जाते है,देश के विकास के लिए जरूरी बताकर टैक्स के पैसों से मौज उड़ाते है और बाद में सत्ता,बैंक अधिकारी व लुटेरे मिलकर इसको एनपीए अर्थात वसूली न किये जाने लायक पूंजी घोषित कर देते है।सारे नियम कायदे ठेंगें पर रख दिये जाते है!सरकारें पिछले दरवाजे से राइट ऑफ करने के नाम पर वसूली से मुक्ति दे देती है या मेहता/मोदी/माल्या जैसे लोग सत्ता के लुटेरों के सहयोग से देश छोड़कर भाग जाते है!
पिछले दस सालों में लगभग 9लाख करोड़ रुपये की बड़े-बड़े लुटेरों के कर्जों को माफी,टैक्स में राहत के नाम पर छूट दी जा चुकी है व कुछ कर्जे माफ होने के लिए बैंकों व सत्ता की टेबलों पर फ़ाइलें खामोशी के साथ आगे सरक रही है!लेकिन बात फांसी के फंदे पर लटके किसान की आती है तो भांड मीडिया,सत्ताधारी लुटेरे व तथाकथित अर्थशास्त्रियों को लगने लगता है कि देश को अर्थव्यवस्था खतरे में चली जायेगी। राजस्थान में प्राकृतिक संसाधनों की लूट जमकर हो रही है।लगभग 10हजार करोड़ रुपये का बजरी घोटाला व 3लाख करोड़ रुपये का खान घोटाला सामने आ चुका है!बाड़मेर रिफाइनरी के नाम पर पिछले 8सालों सेपश्चिमी राजस्थान की जनता को बेवकूफ बनाया जा रहा है और क्रूड ऑयल जामनगर की अम्बानी कीरिफाइनरी को भेजा जा रहा है व उसकी 3%स्थानीय रॉयल्टी बाड़मेर की जनता के विकास के लिए नहीं दी जा रही है।हर साल लाखों करोड़ रुपये लुटेरे मिलकर लूट रहे है!राजस्थान की जमीन खोखली कर दी।राजस्थान के किसानों पर लगभग 82हजार करोड़ रुपये का कर्जा है जिसको माफ करने की मांग विभिन्न किसान संगठनों द्वारा की जा रही है लेकिन सरकार खजाना खाली बताकर अपना पल्ला झाड़ रही है।आज हालात यहां तक पहुंच गए है कि बैंक किसानों की कृषि भूमि की कुर्की के आदेश निकाल रहे है।न सरकार की तरफ से ध्यान दिया जा रहा है न तथाकथित किसान नेता ऐसे किसानों की मदद को आगे आते है।ऐसा ही एककुर्की का आदेश गांव-नौसर तहसील ओसियां जिला-जोधपुर का सामने आया है जहां hdfc बैंक ने कुर्की का इश्तिहार जगह जगह चस्पा किया है। जब आज मकर सक्रांति का त्यौहार मनाकर,पकोड़े खाकर किसान सुबह उठेंगे तो एक किसान की कृषि भूमि नीलाम होते देखेंगे।जिस किसान की भूमि कल नीलाम होगी वो क्या आज मकर सक्रांति का त्यौहार मना पायेगा?त्यौहारों पर सड़को पर उत्पात मचाने वाले आरएसएस के संगठन क्या इस किसान के समर्थन में खड़े होंगे?क्या किसान नेता जो हमेशा किसानों की लड़ाई लड़ने का दावा करते है वो इस असहाय किसान की जमीन बचाने में मदद को आगे आएंगे?
लोकतंत्र में जनसमर्थन के आगे सरकारों को झुकना पड़ता है व सरकार से बड़ा न कोई बैंक होता है और न कोई अन्य वितीय संस्था!देखते रहिये किस तरह हजारों करोड़ रुपये डकार कर ऐशो आराम करने वालों को छोड़कर एक किसान की जिंदगी बर्बाद की जाती है व किस तरह किसान नेता व तमाम तरह के किसान संगठन किसानों के हकों की लड़ाई लड़ते नजर आते है!

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