We care for cast capitalism and Religions√√
जी! यही हकीकत है इस देश की सियासत व हुकूमत की!आप ज्यादा पीछे मत जाइए बस पिछले चार साल की मोदी सरकार की कार्यप्रणाली का ही विश्लेषण कर लीजिए।आपके समझ मे आ जायेगा कि इस देश की राजनीति आपके साथ कितना भद्दा मजाक कर रही है!चौबीसों घंटे नेताओं के मुंह से निकलने वाले बयानों व मीडिया में चल रही बहस को देखते जाइये तो आपको अहसास होता जाएगा कि सरकार को शायद हमने धर्म व जातियों को आबाद रखने के लिए ही चुना है।बाबा साहब अम्बेडकर ने कहा था कि संविधान बहुत अच्छा है लेकिन इनकी अच्छाइयां लोगों तक कितनी पहुंचेगी यह इस बात पर निर्भर करेगी कि इसको लागू करने के लिए सत्ता में बैठे लोगों की नीयत कैसी है!अब बात संविधान से बिछड़कर कार्यपालिका में बैठे लोगों की नियत पर ही आ टिकी है। पिछले चार साल में हमे हर रोज यह बताया गया कि मुस्लिम हिंसक होते है,ईसाई धर्म परिवर्तन का धंधा कर रहे है,हिन्दू बहुसंख्यक है इसलिए अल्पसंख्यकों को दबा रहे है!हर छोटी बड़ी घटना को जाति व धर्म के नजरिये से परोसा जा रहा है।कार्यपालिका और मीडिया मिलकर इस देश की जनता का मानसिक शोषण कर रही है और जनता को बुनियादी मुद्दों से भटकाकर धर्म के अखाड़े में लाकर खड़ा कर दिया है।क्या हमने सरकार हमारी बुनियादी समस्याओं से निजात दिलवाने के लिए चुनी है या धर्म का धंधा करने के लिए?अगर दिमाग मे धर्म की अफीम ज्यादा घुसा दी गई है और आपकी स्मरण शक्ति कमजोर हो गई है तो मैं कुछ बुनियादी समस्याओं से जुड़े आंकड़े आपके सामने रख रहा हूँ आप दिमाग पर जोर डालकर पढ़ते हुए अपने चारों तरफ नजर घुमाने की कोशिश करिये.....
1.भारत मे हर रोज 2137पांच साल के कम उम्र के बच्चे मर जाते है यानी हर घंटे 89 बच्चे दुनियाँ से रुखसत हो जाते है।2.भारत मे 21%बच्चे कुपोषित है ।दुनियाँ के 50%कुपोषित बच्चे भारत मे है। भारत के बाद नाइजीरिया व कांगों का नंबर आता है।
3.भारत मे हर घंटे 5महिलाओं की मौत प्रसव के दौरान हो जाती है।
4.भारत मे महिलाओं की आधी आबादी कुपोषित है व ग्रामीण भारत मे 56%महिलाएं कुपोषित है।
5.दुनियाँ की सबसे ज्यादा कुपोषित महिलाएं भारत मे रहती है।पाकिस्तान व नाइजीरिया से ही ऊपर है।
6.हंगर इंडेक्स यानी भुखमरी में भारत का स्थान 100वें नंबर पर है यानी कुछ ही देशों से ऊपर है।इस मामले में पाकिस्तान व बांग्लादेश जैसे देश भी भारत से सारिणी में ऊपर है।
7.भारत मे हर साल 12हजार किसान आत्महत्या करते है यानी लगभग हर घंटे 4किसान।भारत मे हर किसान
चाहता है कि मेरा बेटा खेती से परे कोई रोजगार ढूंढ ले!
8.भारत मे 13लाख 62हजार प्राथमिक स्कूल है जिसमे से 98,443स्कूल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे है तो 41लाख शिक्षकों के पद खाली है।हर साल गुणवत्ता सुधार के लिए 2.25लाख करोड़ रुपये का बजट चाहिए लेकिन भारत सरकार 70से 80हजार करोड़ रुपये बजट आवंटित कर रही है यानी खाई उत्तरोत्तर बढ़ रही है।
9.दुनियाँ के 200सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में भारत का एक भी विश्वविद्यालय नहीं है। IIT जैसे संस्थानों में 25%तक पद खाली पड़े है तो विभिन्न विश्वविद्यालयों में 14से 60%तक शिक्षकों के पद खाली है।
10.आठवीं तक पढ़ने वाले हर 10बच्चों में से 7बच्चे माध्यमिक शिक्षा अर्जित कर पाते है तो उच्च माध्यमिक पास हर 9में से एक बच्चा विश्विद्यालय पहुंचता है।
11.भारत की एक तिहाई आबादी यानी 42%गरीबी की रेखा से नीचे जीवनयापन कर रही है।दुनियाँ की सबसे ज्यादा गरीब आबादी इस देश मे रहती है।
12.सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 10करोड़ लोगों की पीने के शुद्ध पानी तक पहुंच नहीं है। हकीकत के धरातल पर देखोगे तो आधी से ज्यादा आबादी शुद्ध पेयजल के अभाव में भटकती दिखेगी।
13.साढ़े 6लाख गांवों में से लगभग डेढ़ लाख गांव ऐसे है जहां 5से10घरों में बिजली पहुंची है लेकिन उस गांव को पूर्ण विद्युतीकरण मान लिया गया और बिजली कितने घंटे गांवों में दी जा रही है उससे आप खुद वाकिफ है।
14. भारत मे गरीबी का कारण मुख्यतया बीमारीं है।2व्यक्ति तमाम योजनाओं के माध्यम से गरीबी के दुष्चक्र से बाहर निकलते है तो महंगी व दुर्लभ चिकित्सा के कारण बीमारीं 3व्यक्तियों को गरीबी में धकेल देती है। भारत मे 1681 मरीजों को देखने के लिए एक डॉक्टर है।देशभर में एक चौथाई आबादी का दिमाग दुरुस्त करने के लिए यानी पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजिस्टिक सिर्फ 65 है।
15.ग्रामीण क्षेत्रों में रात में चलने वाले यातायात के साधनों में आधे से ज्यादा अपनों को लेकर इलाज के लिए
भटकने वाले लोगों का होता है।सरकारी अस्पताल खुद वेंटिलेटर पर है और निजी अस्पताल इतने महंगे है कि गरीब लोग सामने से गुजरने से भी परहेज करते है।
16.भारत मे लगभग 3करोड़ 10लाख ऐसे परिवार है जिनके पास रहने को पक्का मकान नहीं है।भारत के शहरों में 30लाख ऐसे परिवार है जो बेघर है और फुटपाथ,ओवरब्रिज के नीचे या सरकारी संस्थानों की दीवारों के साथ अपना गुजर-बसर करने को मजबूर है।भारत सरकार 2022तक सबको मकान देने का पोस्ट डेटेड चेक तो दे रही है लेकिन हकीकत के धरातल पर यह भी निर्धारित नहीं कर पाई की मकान देने किसको है यानी जरूरतमंदों का ठीक से डेटा तक नहीं जुटा पाई है।
17.बेरोजगारी!यही वो हथियार है जिससे असली मुद्दों से ध्यान भटकाया जाता है।हर साल 2करोड़ रोजगार पैदा हो तो नियंत्रित की जा सकती है लेकिन पिछले चार सालों में 1लाख 35हजार रोजगार दिए गए है।
ऐसे भयावह हालात से जूझ रही भारत की जनता के बीच बहस, चर्चा का मुद्दा क्या होना चाहिए? अपने मासूम
की माटी गोद मे लिए भटक रही माँओं के आंसुओं पर चर्चा कौन करेगा?कंधे पर हल लेकर देशभर की भूख
का हल निकालने वाला किसान खेत मे खुद के लगाए पेड़ पर फंदा डालकर झूल जाता है! इस पर चर्चा, बहस
कौन करेगा? पति के साथ सिर पर तगारी उठाकर सड़कों, इमारतों के लिए कंकड़,गिट्टी डालती भारत माताएं
कुपोषण के कारण तगारी सहित ऐसे गिरती है कि किनारे बैठे उनके बच्चे सदा के लिए बिलखते ही रह जाते है
उनकी चर्चा, बहस कौन करेगा? सरकारी अस्पतालों की दहलीज से निकलती लाशें हमे क्यों उद्वेलित नहीं कर
पाती? सरकारी स्कूलों में शिक्षा के नाम पर भटकते बचपन की तन्हाई को दिशा देने की बात कौन करेगा?इंसानियत को जिंदा रखने के लिए सड़कों पर उत्पात मचाते इन भगवानों को घर के आले/अलमारी में रख लीजिए! बचपन को महफूज रखने के लिए धर्म का झंडा उठाते राजनेताओं को जूतों की माला पहनाने की तरफ आगे बढिये!खेती किसानी को बर्बादी के मंजर से बचाने के लिए इन धार्मिक जुलूसों पर सर्जिकल स्ट्राइक कर दीजिए! खुले आसमान तले मौसम की मार से मरती मानवता को जिंदा रखने के लिए मंदिर-मस्जिद-गिरिजाघर बनाने के कार्यों से खुद को अलग कर लीजिए!काल्पनिक भारत माताओं की आड़ में धंधा चलाने वाले लोगों को आबाद करने के जाल में न फंसकर धान रोपती, सड़क पर झाड़ू मारती, सड़कों पर गिट्टी डालती असली भारत माताओं को बचा लीजिये! आज भारत की सियासत व हुकूमत जो काम कर रही है वो काम मानवता को बचाने का कतई नहीं हो सकता! हर घंटे,हर दिन,हर जगह, हर नेता,हर हुक्मरान,हर मीडिया धर्म की अफीम घोल रहा है।यह धर्म नहीं बल्कि जनता को भ्रम में डालकर मानवता को मौत में धकेलने का षड्यंत्र है! इस षड्यंत्र को समझिये और अपने बुनियादी मुद्दों पर लौट आइये। हमने लोकतंत्र का रास्ता धार्मिक नफरतों को फैलाने के लिए नहीं अपनाया है। हमने जनप्रतिनिधि धर्म की रक्षा के लिए नहीं नियुक्त किये है।हमने विधायक, सांसद बुनियादी समस्याओं के समाधान निकालने के लिए चुने है न कि धार्मिक जुलूसों का नेतृत्व करने के लिए। नेता सिर्फ चुनाव जीतने के चक्कर मे लग गए है। मीडिया उनके साथ होकर हफ्ता-वसूली करने वाली गैंग बन चुकी है। नेता व मीडिया मिलकर धर्म के जाल में आपको फंसाकर देश लूट रहे है! धर्म का चश्मा एक तरफ रखकर बुनियादी मुद्दों पर डट जाओ नहीं तो एक एक करके ये लोग जल्द ही बड़ी आबादी को निपटाने की कगार पर पहुंचा देंगे!
की माटी गोद मे लिए भटक रही माँओं के आंसुओं पर चर्चा कौन करेगा?कंधे पर हल लेकर देशभर की भूख
का हल निकालने वाला किसान खेत मे खुद के लगाए पेड़ पर फंदा डालकर झूल जाता है! इस पर चर्चा, बहस
कौन करेगा? पति के साथ सिर पर तगारी उठाकर सड़कों, इमारतों के लिए कंकड़,गिट्टी डालती भारत माताएं
कुपोषण के कारण तगारी सहित ऐसे गिरती है कि किनारे बैठे उनके बच्चे सदा के लिए बिलखते ही रह जाते है
उनकी चर्चा, बहस कौन करेगा? सरकारी अस्पतालों की दहलीज से निकलती लाशें हमे क्यों उद्वेलित नहीं कर
पाती? सरकारी स्कूलों में शिक्षा के नाम पर भटकते बचपन की तन्हाई को दिशा देने की बात कौन करेगा?इंसानियत को जिंदा रखने के लिए सड़कों पर उत्पात मचाते इन भगवानों को घर के आले/अलमारी में रख लीजिए! बचपन को महफूज रखने के लिए धर्म का झंडा उठाते राजनेताओं को जूतों की माला पहनाने की तरफ आगे बढिये!खेती किसानी को बर्बादी के मंजर से बचाने के लिए इन धार्मिक जुलूसों पर सर्जिकल स्ट्राइक कर दीजिए! खुले आसमान तले मौसम की मार से मरती मानवता को जिंदा रखने के लिए मंदिर-मस्जिद-गिरिजाघर बनाने के कार्यों से खुद को अलग कर लीजिए!काल्पनिक भारत माताओं की आड़ में धंधा चलाने वाले लोगों को आबाद करने के जाल में न फंसकर धान रोपती, सड़क पर झाड़ू मारती, सड़कों पर गिट्टी डालती असली भारत माताओं को बचा लीजिये! आज भारत की सियासत व हुकूमत जो काम कर रही है वो काम मानवता को बचाने का कतई नहीं हो सकता! हर घंटे,हर दिन,हर जगह, हर नेता,हर हुक्मरान,हर मीडिया धर्म की अफीम घोल रहा है।यह धर्म नहीं बल्कि जनता को भ्रम में डालकर मानवता को मौत में धकेलने का षड्यंत्र है! इस षड्यंत्र को समझिये और अपने बुनियादी मुद्दों पर लौट आइये। हमने लोकतंत्र का रास्ता धार्मिक नफरतों को फैलाने के लिए नहीं अपनाया है। हमने जनप्रतिनिधि धर्म की रक्षा के लिए नहीं नियुक्त किये है।हमने विधायक, सांसद बुनियादी समस्याओं के समाधान निकालने के लिए चुने है न कि धार्मिक जुलूसों का नेतृत्व करने के लिए। नेता सिर्फ चुनाव जीतने के चक्कर मे लग गए है। मीडिया उनके साथ होकर हफ्ता-वसूली करने वाली गैंग बन चुकी है। नेता व मीडिया मिलकर धर्म के जाल में आपको फंसाकर देश लूट रहे है! धर्म का चश्मा एक तरफ रखकर बुनियादी मुद्दों पर डट जाओ नहीं तो एक एक करके ये लोग जल्द ही बड़ी आबादी को निपटाने की कगार पर पहुंचा देंगे!

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