Public private partenership

हम हिंदी में इसे सार्वजनिक निजी भागीदारी कह सकते है।PPP या P3 भी कहा जाता है।दुनियाँ में वैसे तो जितने भी बड़े बदलाव हुए है वो जनता के आंदोलन द्वारा स्थापित सत्ता द्वारा सार्वजनिक अर्थात सरकारी उपक्रमों के माध्यम से किये है लेकिन मानवीय सोच सबके भले की हो जाये तो धरातल पर संघर्ष किस बात का हो! सबसे पहले ब्रिटेन के 5उद्योगपत्ति परिवारों ने मिलकर सत्ता में घुसपैठ की और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को बदनाम करके हड़पने का षड्यंत्र किया।जब इसे ब्रिटेन में लागू किया गया तो इसे Private financial initiative नाम के रूप में पेश किया गया व सार्वजनिक व निजी हाथों के भेद को बेहद महीन रखा गया ताकि किसी को तुरंत पता नहीं चले कि आगे वो क्या करने वाले है!
धीरे-धीरे 20वीं सदी की शुरुआत में यह बीमारी सोशलिज्म को रौंदते हुए दूसरे देशों में फैलती गई और 
मीडिया के माध्यम से पुरजोर प्रसार हुआ कि यही व्यवस्था पूरी दुनियां के गरीबों के दुःख-दर्द दूर कर देगी! मृग-मरीचिका की तरह दुनिया भर के गरीबों को इसमें अपना भविष्य मीडिया के माध्यम से दिखाया गया।पूंजीवादी व्यवस्था के सबसे बड़े बैक्टेरिया के रूप में यह PPP मॉडल संक्रमित करके दुनियाँ भर के गरीबों की हत्या करता रहा लेकिन मध्यम वर्ग गरीबों के साथ खड़ा होने के बजाय इसमें अपना भविष्य ढूंढने लग गया।
गरीबों की दुर्दशा तो होनी ही थी लेकिन अब हर जगह मध्यम वर्ग खत्म करने का अभियान बड़े जोर-शोर से चल रहा है।इस PPP मॉडल से सबसे ज्यादा बर्बाद मध्यम वर्ग हुआ है।गरीब दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर थे और आज भी है।मगर भविष्य में उजलत ढूंढने वाले मध्यम वर्ग के पास आगे का क्या रास्ता है इस बारे में किसी के पास कोई जवाब नहीं है।मध्यम वर्ग ने आंदोलनों व क्रांतियों से दूरी बनाकर छींका कहीं और डाल दिया तो वो अब सिर्फ और सिर्फ बर्बादी के इंतजार में बैठे है।
दुनियाभर के 40से ज्यादा देशों ने इस रोग को पूर्णरूप से अपना लिया है और उस देश के 40-50लोग तय करते है कि हमारे देश से कितने गरीबों को विदा करना है और कितने लोगों को हमारे मॉडल को चलाने के लिए जिंदा रखने की जरूरत है!70से ज्यादा देश इस बीमारी से संक्रमित हो गए है या अभी हो रहे है उसमे दुनियाँ का सबसे बड़ा लोकतंत्र अर्थात भारत भी शामिल है।
PPP मॉडल में सबसे बड़ी लूट व मध्यमवर्ग के साथ दरिंदगी भारत मे ही हो रही है। गरीब हर infrastructure के निर्माण में अपनी मजदूरी लेकर लौट रहा है लेकिन आजादी के बाद भारतीय समाज मे पैदा हुआ मध्यम  वर्ग पूरी दुनिया से जुदा एक नई मनुवादी व्यवस्था से पीड़ित मरीज नजर आता है।इतिहास के पन्नो को लपेटोगे तो आपसी विद्वेष ही खड़ा हो पायेगा!

हर देश मे व हर सरकार में यह PPP मॉडल नये-नये रूपों अर्थात नई चासनी के साथ मध्यम वर्ग की थाली में परोसा गया है।बड़ा दुखद पहलू है कि भारतीय मॉडल में पूंजीवादी मॉडल को कम्युनिष्ट मॉडल से बेहतर बताकर परोसा जा रहा है लेकिन हजारों साल पुरानी भारतीय व्यवस्था का मॉडल अर्थात सोशलिज्म कहीं छुप सा गया है!
जो भारत सरकार ने मॉडल अपनाया है उससे स्वस्थ नागरिक कम मरीज ज्यादा पैदा हुए है।एक छोटे के उदाहरण के माध्यम से बताना चाहता हूं।PPP मॉडल पर देशभर में सड़के बनाई गई।टोल नाकों व टोल टैक्स को आप रोज झेल ही रहे हो।
PPP से निर्मित सड़क के मॉडल को देखिए!माना कि सड़क निर्माण PPP मोडल से हो रहा है। 100KM सड़क बनाने का खर्चा 100करोड़ है।किसी उद्योगपत्ति के रिश्तेदार मंत्री की प्राइवेट कंपनी को यह ठेका मिलने जा रहा है!जनता द्वारा चुनी हुई सरकार के मंत्री यह टेंडर पास करेंगे!इस मॉडल में गरीब जनता को धमकाने के लिए भारतीय मॉडल में संयोजन किया गया कि इस रोड़ निर्माण करने पर हमें कोई फायदा नहीं होगा क्योंकि सड़क निर्माण करने पर उतना आवागमन ही नहीं होगा कि हमारे खर्चे की पूर्ति कर सके! 

इसलिए सार्वजनिक बैंकों से जो कि जनता की कमाई का उपागम है उससे डेबिट मांगते है!20करोड़ रुपये 
viability gap fund के नाम पर राज्य सरकार से वसूली और 20करोड़ रुपये केंद्र सरकार से वसूली! यह माल लुटाने वाले कोई और नहीं बल्कि आपके व हमारे द्वारा चुने गए नेता है।10करोड़ रुपये मध्यम व गरीब वर्ग से निकले अधिकारी लोगों का कमिसन होता है और 50करोड़ का लोन इस देश के मध्यम व गरीब लोगों की प्रॉपर्टी होती है।भारतीय PPP मॉडल में 10 से लेकर 30 सालों तक का वसूली मॉडल है।100करोड़ रुपये की पूंजी हमारी ही गाढ़ी कमाई से एक सत्ता द्वारा दलाल तैयार किया जाता है व उस पर लुटाने के लिए पूरे 125करोड़ की वसूली का इंतजाम किया जाता है।अखबारों में पढ़ते ही होंगे कि 5साल पहले सड़क बनाने वाली कंपनी ने वसूल कर लिया लेकिन अभी तक जनता को लूट रही है! देश का सेमीफाइनल मैच चल रहा है व फाइनल मैच की तैयारी सब कर रहे है लेकिन इस देश के गरीब व मध्यम वर्ग की 100करोड़ जनता की बात कब व कौन करेगा! सबसे बड़ा सवाल यही है
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