देहाती इश्क

साचो प्रेम तो बो ही हो😛

आज तो प्रेम के दर्द को इन गांव आळ टिंगरा ने जख्म हरा कर दिया।

टिंगर पूछ हैं, के थे ही मोहब्बत करी ही के भाईजी

 करी फेर कितिक पूछ ना, हर 12 वे महीने एक न विदा करतो

म्हारे टाइम तो कागज हर कलम होया करती, हर कागज गो हुलियो ही बदल जाया करतो ।  हिम्मत करगे ल बाई ओ कागज।

मरज्याणा मेरे बाबे न कवन दे कागज लेगे कैवती।

अब क्यागों प्रेम है म्हे बन्गे ब्याह में भाज भाज गे काम करता
छोरी गो बाप कवतो क आपणे बटाऊ गी ध्यान तू राखी भलौ जिजोजी है तेरो

 हर बा 3 4 साला महीना बाद गाम आती तो आप हारे टाबरां न कवती क मामोजी को नमस्ते बोलो बेटा😐😁😁😁😁

आजकल तो एक दूसरे की छीन लेव है
 पहलड़ी वादे गी पकी होवती या तो मेरी देखेड़ी है

सचो प्रेम करू हूँ थारे सुऊँ आ बतावणं ख़ातर तो थेपडी ओर थपाणी पड़ती

https://sunilmoga.blogspot.com/






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