चटखते अक्षर-सी लड़की (एक मुलाकात)

पहली बार  J&K Grameen Bank Head Office में मिले थे तुम मुझे --............... बेतरतीब कलमों में सलवार-क़मीज़ पहने  चटखते अक्षर-सी लड़की कुछ ढूँढ़ती हुई । .. तुमने जब मुस्करा कर मुझे ' हलो  ' कहा तो भीतर तक खिल गया था। अपने गालों की लाली से बेख़बर थे क्या तुम ? कौन जानता था तब कि उन यादों के रंग  इतने चटखीले होंगे,तुम्हारी हर अदा को कनखियों से देखता हूँ मैं, तुम्हारा फोन पर ही उपस्थिति से भी खुश हो जाता हूँ। आपकी एक छोटी सी हँसी से मेरे ह्रदय की अमराइयों में न जाने कहाँ से स्वर पा कर कोयल-सी कूकने लगती है। शायद तुम स्वयं भी अपनेे दिल की धड़कनों से पूरी तरह परिचित नहीं हो । तुम्हारी हँसी मेरे कानों में जलतरंग-सी क्यों बजने लगती है। इन बातों पर ज्यादा गौर मत करो प्रिये! ये सब काल्पनिक हैं। सिर्फ कह देने से प्यार नहीं हो जाता, प्यार एक खूबसूरत अहसास है, जो आँखों से दिखाई नहीं देता !उसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है, और उसके लिए प्यार से भरा हृदय चाहिए, जो अपने प्रेमी की तड़प को  समझ  सके ! मैं सप्तम स्वर से पहले ही टूट गई वीणा की तार का अधूरा संगीत हूँ प्रिये! जब जमू आई और कॉन्फ़्रेंस के बाद अचानक तुम से siot में मुलाक़ात हो गई तो उस शाम स्मृतियों की अनगिनत लहरें उठीं और हिम्मत करके मैंने भरपूर निगाहों से तुम्हें एकटक देखा । सुबह तुम्हारे जाने के साथ ही मेरी अधूरी कथा पहाड़ियों में खो गई उस गेंद-सी थी जो दोबारा आज तक नहीं मिली है । ऐसा कोई तावीज़ करवा दो आप मुझे अपने नाम से जो मै गले में बांध कर फिरता रहूंगा   फिर आप को कोई चिंता नहीं रहेगी। सच कहूं तो आप के गालों की लाली देखकर यह भी भूल गया था कि एक खूबसूरत सी जेंटलमैन लड़की का पति और एक शैतान से बच्चे का मैं पिता भी हूं मैं । जाने क्यों अब मेरी पेन रुक रही है। मन में यह बात भी आ रही है कि बहुत सी फिजूल बातें तुमको लिखकर तुम्हे चिंता के भंवर में डालने जा रहा हूं। प्रेम में मेरी गहरी रुचि है। इस रुचि से मुझे अलग दृष्टि मिली है। डियर , सेनोरिटा बहुत से सवाल इस समय मेरे दिमाग में हैं। वैसे इनमें से अधिकतर फिजूल के हैं। अब पता नहीं क्यों दिल और दिमाग अलग-अलग राहों पर बढ़ने के लिए तत्पर हो रहा हैं। क्या इसी को प्रेम होना कहते हैं? लेकिन मैं यह चाहता हूं कि तुम मेरे मन में चल रही उधेड़बुन से अवगत रहो। और हां, यह सारी बातें तुमको लिखने से मैं मानसिक रूप से खुद को असहज अनुभव कर रहा हूं। आपका प्रेम मेरे लिए मृगतृष्णा की तरह है। ‘‘मैं मेरी बीवी से बहुत प्यार करता हूं सेनोरिटा ! उससे अलग होकर एक पल भी नहीं जी सकता। उसके प्यार  के अलावा मेरे जीवन का कोई दूसरा संबल नहीं है। अब तो पता नहीं क्यों, बिना उसके आने वाली हरेक रात मुझे नरक की रात लगती है। यूँ समजो कि वो मेरी बंद मुठ्ठी में एक एक चाँदी के सिक्के जैसी है । यही कारण है कि बिना आपके विरोध के बावजूद भी हमारा प्रेम काल्पनिक निकला, क्योंकि इस तरह यदि मुझे आप से प्रेम हुआ तो आप के प्यार का  खलनायक ही बन के  रह जाऊंगा। ‘‘सिर्फ सेक्स और सुविधाओं का अंबार ही प्यार नहीं होता सेनोरिटा, मुझे भावनाओं में इस तरह नहीं बहना चाहिए था। मन कर रहा है पन्ना फाड़ दूं, और नए सिरे से तुम्हें दूसरा पत्र लिखूं। परंतु उससे यह अहसास कहीं मन के किसी कोने में दबा रह जाएगा, कि इस बार मन की हर बात मैं आप को न लिख सका।

 खैर,

जरा सा झूठ ही लिख दो कि तुम बिन दिल नहीं लगता हमारा........कि दिल बहल जाए हमारा फिर चाहे मुकर ही जाना.........आगे की बात फिर कभी किसी खत में।

सुनील मोगा

https://sunilmoga.blogspot.com/

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