सवाल खुद से तो जवाब और कहाँ मिलेगा?


मतलब बिलकुल स्पष्ट है....वक्त हमारे अनुकूल स्वयं की लय में कोई बदलाव तो लाने से रहा फिर  .....फिर हमें स्वयं को वक्त के साथ ही कदम ताल करना होगा। हम भूतकाल को पीछे छोड़कर वर्तमान में कदम रखते हैं और हम उम्मीद में रहते हैं कि हमारा वर्तमान और भविष्य भूतकाल से बेहतर होगा हमारी बीते हुए समय से शिकायत रहती है कि हमें उस बीते समय ने कुछ खास नहीं दिया बस उसने सबसे ज्यादा खास यह दिया कि हम इस दुनिया में मौजूद है! दुनिया में ऐसा कोई इंसान नहीं होता जिसे कोई समस्या ना होऔर दुनिया में कोई ऐसी समस्या नहीं हैजिसका कोई समाधान नहीं होजिंदगी इन्हीं खट्टे मीठे अनुभव के इर्द-गिर्द घूमती हैंऔर इस चक्कर खाती हुई जिंदगी को स्थिर करना इंसान का खुद का काम है,अतीत के कड़वे स्मरण इंसान को कमजोर बनाते हैं। मैं "आज" में जीना पसन्द करता हूँक्यूँकि बीत चुके कल में मैं जा नही सकता और आने वाले कल को सिर्फ़ सोच सकता हूँजब तक कि वो मेरा "आज"  बन जाए , आप केवल अपने "आज" को जी सकते हैंमहसूस कर सकतें हैं बीत चुके कल से बेहतर बना सकतें हैं अतः सिर्फ़ "आज" को जीने की आदत डालिऐ ।मैं आज तक तय नहीं कर पाया कि असली सफल कौन हैसफलता का पैमाना क्या हैजीवन का मकसद क्या हैअगर यह संदेश आप पढ़ रहे हैं तो आप उन लोगों से बहुत आगे हैं जो एक अरब लोग इसे कभी पढ़ नहीं सकते। आप ने आज की सुबह उठकर चाय पी अखबार पढ़ा और अपने मोबाइल फोन पर व्हाट्सएप और फेसबुक के नोटिफिकेशन चेक किए हैंतो आप दुनिया के मात्र 40% सुखी लोगों में आते हो क्योंकि दुनिया के 60 % लोगों के पास एंड्रॉयड मोबाइल पीने के लिए चाय और पढ़ने के लिए अखबार नहीं है! अगर आपके पास है फ्रिज में खाना पहनने के लिए कपड़े रहने को छत और सोने की जगह तो आप 75% दुनिया से ज्यादा अमीर हैं !अगर आपके पास बैंक में खाते और वायलेट में पैसा है! तो आप दुनिया के आठ प्रतिशत अमीरों में से एक हैं ! अगर आज सुबह सोकर उठने पर आप स्वस्थ हैं तो आप उन सबसे ज्यादा खुश नसीब है जो दस लाख लोग इस हफ्ते दुनिया में नहीं रहे ! अगर आपने कभी लड़ाई या युद्ध के खतरे को नहीं देखा जेल में रहने का के दर्द से बचे रहे भूख से होने वाली पीड़ा नहीं सही तो आप उन 50 करोड़ लोगों से ज्यादा सुखी हैं जो जिंदा है और कष्ट में है !

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