भारतीय क्रांतिकारी स्वरूप!

भारत मे निजी फाइव स्टार अस्पतालों में जुकाम का इलाज करवाकर 

सरकारी अस्पतालों व सरकारी डॉक्टरों को तकिया लगाकर गालियां देने 

वाले लोग चिकित्सा जगत के क्रांतिकारी नेता माने जाते है! जबकि 

हकीकत यही है कि जो लोग अपना इलाज सरकारी अस्पतालों में करवाते 

हुए असुविधाओं के प्रति सत्ता का ध्यान आकर्षित करते है,सत्ता से बेहतर 

सुविधाओ की मांग करते है वो क्रांतिकारी बदलाव के वाहक होते है।

भारत मे जो लोग अपने बच्चों को महंगे कान्वेंट/निजी स्कूलों में भेजकर 

शिक्षा व्यवस्था को गालियां देते है,सरकारी शिक्षकों को कामचोर/बेईमान 

घोषित करते है,सरकारी स्कूलों में सुविधाओं की कमियों का मख़ौल 

उड़ाते है वो शिक्षा पद्धति में बदलाव के क्रांतिकारी माने जाते है! जबकि 

अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजकर सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की 

कमी,आधारभूत सुविधाओं की कमी,सेलेबस पर नजर रखते हुए सत्ता 

से उपलब्धता सुनिश्चित करने,सुविधा उपलब्ध करवाने व वैज्ञानिक शिक्षा 

पद्धति को लेकर सत्ता से मांग करते है,सत्ता से सवाल करते है वो ही 

असल मे शिक्षा सुधार की क्रांति के वाहक होते है। अक्सर यह देखा गया 

है कि मिनरल वाटर पीने वाले लोग जनता के लिए शुद्ध पेयजल की मांग 

करते है। लग्जरी गाड़ियों में घूमने वाले लोग सार्वजनिक यातायात प्रणाली 

को दुरुस्त व बेहतर करने की मांग करते है। फर्स्ट क्लास ए सी कोच में 

सफर करने वाले जनरल डिब्बे की भीड़ व सीट को लेकर सवाल खड़ा 

करते है! किसान आंदोलनों के मंचों पर हवाई सफर करके,लग्जरी 

गाड़ियों से तकरीरें करने के लिए क्रांतिकारी किसान नेता पहुंचते है!

मजदूर बिगुल फूंकने के लिए महंगे सुइटेड-बूटेड लोग सबसे आगे सफेद 

चक कपड़ों में चलते है। क्रांति के लिए इतने महंगे क्रांतिकारी नेताओं की 

जरूरत बनी रहती है वहां कोई क्रांति नहीं हो सकती।कभी-कभी इन 

भ्रान्तिकारी नेताओं को दुनियाँ भी क्रांतिकारी नेता समझ बैठती है!भारत 

जैसे अभागे हजारों साल गुलाम रहे देश मे सदा लॉजिक पर मैजिक को 

महत्व दिया जाता रहा है इसलिए जनता भ्रांति को ही क्रांति मान 

लेती है।
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