दलित वो होते जो आर्थिक/ शारीरिक/ पिछड़े/ दबे/ शोषित /कुपोषित और मानसिक रूप से कमजोर हो।
बाबा साहेब ने दलित का दर्जा ऐसे ही लोगों को दिया है।
बाबा साहेब ने दलित का दर्जा ऐसे ही लोगों को दिया है।
दलित किसी जाति विषेश की उपाधि नही होनी चाहिए! दुनिया का हर वो इंसान दलित है! जो हर तरह
कमजोर है,आजकल सब खुदा है,कोई कम नही किसी से सारे एक दुसरे को "डिलीट" करने पर तुले हुए हैं।
कमजोर है,आजकल सब खुदा है,कोई कम नही किसी से सारे एक दुसरे को "डिलीट" करने पर तुले हुए हैं।
अब दलित नही "डिलीट" कहा जा सकता है,कमजोर लोग हर उंची / निचली जातियों मे होते हे। जो कमजोर
लोग होते है, उनको "डिलीट" करने की सब कोशिश करतें हैं। कमजोर का हमेशा शोषण होता आया है,
होता है और होता रहेगा।
लोग होते है, उनको "डिलीट" करने की सब कोशिश करतें हैं। कमजोर का हमेशा शोषण होता आया है,
होता है और होता रहेगा।
मार्टिन बूबर ऑस्ट्रिया में पैदा हुए इसराइली ज्यूइश दर्शनशास्त्री थे उनहोंने कहा था-
-मनुष्य का मन शांत होगा, दुनिया में शांति होगी-
जब लोग आपके पास मदद मांगने आते हैं तो उन्हें केवल सांत्वना देकर निराश नहीं करना चाहिए। बल्कि इस
तरह मदद करनी चाहिए जैसे ईश्वर है ही नहीं और दुनिया में केवल आप ही हैं जो मदद कर सकते हैं।
जब दो लोगों के रिश्ते का आधार भरोसा और मानवता होता है तो ईश्वर इस रिश्ते में ऊर्जा भर देते हैं।
असल लड़ाई पूरब और पश्चिम या पूंजीवाद और सांप्रदायिकता की नहीं है, शिक्षा और प्रचार-प्रसार की है।

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