देश मजबूत या बूथ मजबूत!

श्रीलंका में आतंकी हमला हुआ और अब तक 70से ज्यादा संदिग्ध हिरासत में लिए गए है!एक पूरा अरबपति परिवार इस हमले में शामिल पाया गया है।अक्सर तमाम आतंकी हमलों में जो भी भागीदार बनता है वो खुद को अपने परिवार से खुद को अलग कर लेता है मगर यह पहला मामला है जिसमे पूरा परिवार शामिल था।
खैर आतंकी हमलों का बदलता ट्रेंड हमारा आज का मुद्दा नहीं है।पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हमला हुआ,44जवान मारे गए(शहीद नहीं कह सकते क्योंकि सरकार नहीं मानती),सुरक्षा में चूक खुद राज्यपाल ने स्वीकार की थी मगर आज तक न हमले के आयोजन कर्ताओं के नेटवर्क का खुलासा हुआ,न कोई दोषी गिरफ्तार हुआ और न ही सुरक्षा में लापरवाही बरतने वालों पर कोई कार्यवाही हुई!
श्रीलंका में न अंतर्राष्ट्रीय प्रधानमंत्री है और न 56इंची सरकार है।श्रीलंका की जांच एजेंसियां हमारे से बेहतर किसी भी हालत में नहीं है!संसाधनों के मामले में भी श्रीलंका हमारे मुकाबले में कहीं नहीं ठहरता है मगर कार्यवाही होते देख श्रीलंका की जनता का सिस्टम पर भरोसा कायम है।
जब ऐसे हमलों के आरोपी गिरफ्तार नहीं होंगे,लापरवाही बरतने वालों पर कार्यवाही नहीं होगी तो जनता सरकार पर भरोसा करने के बजाय सरकार की भूमिका ही संदिग्ध मानने लगती है!आज बहुत से लोग दबी जुबान से चर्चा कर रहे है कि पुलवामा हमला चुनावों के मद्देनजर हुआ है!ऐसा तो था नहीं कि डेढ़-दो क्विंटल आरडीएक्स एक गाड़ी में भरकर मसूद अजहर का रसोइया पाकिस्तान से सीधा आया और बस को उड़ा दिया व खुद भी उड़ गया इसलिए पाकिस्तान को गालियां देकर इतिश्री कर ली जाए या बालाकोट में बम फेंककर देश की जनता को गुमराह कर दिया जाए!
आतंकी ठिकानों पर बम फ़ेंकना साहस भरा कार्य है उसके लिए सेना धन्यवाद की पात्र है मगर भारत सरकार की भूमिका इस हमले की जांच की थी और दोषियों पर कार्यवाही की उसका क्या हुआ?
नेटवर्क का खुलासा न होना,हवाई जहाज के बजाय काफिले को सड़क मार्ग से भेजना,सिविलियन गाड़ियों की आवाजाही को न रोकना(अक्सर सुरक्षा बलों का काफिला गुजरता है तो सड़क मार्ग खाली करवाया जाता रहा है),लापरवाही बरतने वालों पर कार्यवाही न होना,सरकार के मुख्या व उनके सहयोगी मंत्रियों द्वारा राजनैतिक सभाओं में पुलवामा के नाम पर वोट मांगना पूरे सिस्टम को ही शक के घेरे में खड़ा करता है!
इस तरह के बुनियादी सवाल पूछने वालों को देशद्रोही,गद्दार, पाकिस्तानपरस्त घोषित करने का अभियान चलाना बहुत कुछ कहता है!

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