आएगा मोदी ही!

यह आत्म विश्वास नहीं बल्कि अंधभक्तों का वहशी घमंड है जो इनके सिर चढ़कर बोल रहा है!2014 में अंधभक्त बनाने वाली महामारी फैलाई गई जिसकी जद में कुल मतदान करने वाली 31%आबादी आ गई और मोदी आ गए!सवाल यह नहीं था उस समय कि कौन आयेगा!सवाल यह था कि आने वाला करेगा क्या?आने वाले के दावे थे व इरादे जताए थे वो क्या थे?
1.किसानों को कर्ज मुक्त करूँगा मगर आंदोलन करने वाले वाले किसानों पर लाठीचार्ज,आंसू गैस के गोले चलाये व दिल्ली में घुसने तक नहीं दिया।
2.स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करूँगा मगर सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट देकर कहा कि स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करना संभव नहीं।
3.किसानों की आय दोगुनी करूँगा मगर पांच साल से कम ही हुई है बढ़ी नहीं और न बढ़ाने का ठोस रोड मैप लागू किया।
4.आतंकवाद-नक्सलवाद का खात्मा करूँगा मगर आज भी आतंकी हमले जारी है।उरी, पठानकोट,पुलवामा जैसे बड़े हमले भी हुए है।44फौजियों के बदले बता रहे है कि हमने उनके सेंकडो आतंकी मार गिराए!वादा तो आतंकवाद खत्म करने का था मगर रोज हमारे जवानों की लाशें क्या आ रही है?
5.दो करोड़ रोजगार दूंगा मगर आंकड़े बता रहे है कि 1लाख 35हजार रोजगार दिये है और नोटबंदी व जीएसटी की जद में आकर 13लाख लोग बेरोजगार हो गए!अगर हर साल 2करोड़ मतलब पांच साल में 10करोड़ रोजगार देते तो लगभग इतनी ही बेरोजगार है सबको रोजगार मिल जाता लेकिन बेरोजगारी 45साल के रिकॉर्ड पर पहुंच गई!
6.सबका साथ व सबका विकास करेंगे मगर धार्मिक नफरत से जो जहर घोला गया वो जातिय नफरत तक पहुंचा दिया गया है!
7.हम सत्ता में आएंगे तो सेना को खुली छूट देंगे और अब दावा भी कर रहे है मगर जवानों के शहीद होने की दर पिछले पांच साल में बढ़ी है।यह कोई नहीं पूछता कि क्या खुली छूट का मतलब ज्यादा जवानों की शहादत से था?
8.भ्रष्टाचार का खात्मा करेंगे मगर तमाम आंकड़े बता रहे है कि भ्रष्टाचार कम नहीं हुआ बल्कि इसकी रेट बढ़ी है व छोटा भ्रष्टाचार बड़े भ्रष्टाचार में तब्दील हुआ है।देश का माल लूटकर 53के करीब लुटेरे देश छोड़कर पिछले पांच सालों में विदेश भाग गए!
9.सामाजिक न्याय करेंगे मगर upsc से चाहे ओबीसी के लड़कों को चयन के बाद बाहर निकलना हो या 13पॉइंट रोस्टर लागू करके विश्वविद्यालयों में ओबीसी/एससी/एसटी को आने से रोकना हो या रोहिणी आयोग द्वारा ओबीसी के खिलाफ षड्यंत्र रचना हो,चाहे संविधान के खिलाफ जाकर 10%आर्थिक आधार पर सवर्णों को आरक्षण देना हो,बिना किसी परीक्षा के स्वर्ण सचिव बनाने हो,हर कदम पर सामाजिक न्याय का गला घोंटने का काम किया गया!
10.समान नागरिक संहिता,राममंदिर,धारा 370 की मैं बात नहीं करूंगा क्योंकि ये बचकानी बातें थी और इन्होंने खुद स्वीकार करके किनारे कर दिया है!यह देश यूनियन ऑफ स्टेटस है,यह देश यूनियन ऑफ रिलिजन है,यह देश यूनियन ऑफ ट्राइब्स है इसलिए ऐसी बातों का कोई महत्व नहीं है!
मोदी 2014 में भी आया था और आगे भी हो सकता है आ जायेगा मगर तुम्हे दिया क्या है उस पर कभी विचार किया?मोदी आने से इन पांच सालों में तुमने क्या हासिल क्या और आगे क्या हासिल कर लोगे!यही न कि बेरोजगार मोदी-मोदी करके बर्बाद होते रहे!यही न कि किसान फांसी पर लटकता रहे मगर दिल्ली में आकर अपनी आवाज न उठा सके!यही न कि जवानों की लाशों का आवागमन बढ़ता रहे!यही न कि छोटे व्यापारियों का माल बड़े उद्योगपत्तियों के हवाले करके बर्बाद कर दिया जाए!यही न कि ओबीसी/एससी/एसटी के लोगों को सत्ता व सिस्टम से बाहर कर दिया जाएं!
सोचिये और गौर करिये इस फर्जी राष्ट्रवाद व फर्जी हिंदुत्व के नशे में झूमने से पहले कि आयेगा तो मोदी ही कहकर अपने घमंड से खुद के पैरों पर कुल्हाड़ी तो नहीं मार रहे हो?
मुझे पता है मेरे अकेले के लिखने से कोई क्रांति नहीं आने वाली है मगर मैं इस बात से खुद को संतुष्ट पाता हूँ कि जब करोड़ो लोग झांसे में आकर अपनी बर्बादी की गाथा लिख रहे है तब मैं अपने मुद्दों पर डटकर खड़ा हूँ।मुझे पता है मेरे लिखने मात्र से मोदी का रास्ता नहीं रुकने वाला लेकिन इस बात से खुश हूँ कि जब झूठ का बवंडर चल रहा है तब भी मैं लोगों को बुनियादी मुद्दे बेबाक व बेख़ौफ़ अंदाज में याद दिला रहा हूँ।अगर कोई मुर्दा बस्तियों में जिंदा हो तो जरूर उठिए और पूछिये "तू इधर-उधर की बात न कर,मुझे यह बता काफिला लुटा क्यों?"

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