धर्म व जाति के उदय के बाद एक ही इंसान दुनियाँ में पैदा हुआ था वो था कबीर।कबीर की कोई जाति न थी और न उनका कोई धर्म था।
जिंदगी भर जाति व धर्म के नाम पर होने वाले अत्याचार,अन्याय,जलालत आदि के खिलाफ लड़ते रहे।पंडितों व मुल्लाओं की कट्टरता के खिलाफ जितना कबीर ने बोला उतना शायद ही दुनियाँ में किसी ने बोला हो!
दुनियाँ में आर्थिक विषमता को लेकर सदियों से संघर्ष चला आ रहा है।रोज कहीं न कहीं चर्चा होती है।कार्ल मार्क्स ने दास कैपिटल लिखकर दुनियाँ को विचार दिया।उस विचार को पकड़कर आदि दुनियाँ साम्यवादी बन गई!
मार्क्स के विचार को पकड़कर लेनिन ने संघर्ष किया और राज किया,माओ ने संघर्ष किया और राज किया मगर कार्ल मार्क्स से भी बड़ा विचारक कबीर था।
साधु इतना पाइए,जहां में कुटुंब समाय!
मैं भी भूखा न रहूँ,साधु न भूखा जय!!
आर्थिक विषमता को खत्म करने का विचार इस उपमहाद्वीप में कबीर ने दिया मगर क्या हश्र हुआ इस विचार का?
आज मगहर में कबीर की मजार पर मुसलमान उठक-बैठक कर रहे है और बहुजन लोग घंटा बजा रहे है!बंगाली ब्राह्मण की होशियारी देखो कबीर की साखियों को दुनियाँ के सामने अनुवाद करके पेश किया और नोबेल पुरस्कार जीत लिया!
कबीरदास खुद ही अपने जीवनकाल में शायद समझ गए थे कि अकेले आर्थिक विषमता की लड़ाई से इस देश के लोगों को इंसाफ कभी नहीं मिल सकता!इसलिए उन्होंने जाति व धर्म के खिलाफ लोगों को जागरूक करना शुरू कर दिया था।
इस देश मे जब से जाति व्यवस्था/वर्ण व्यवस्था आई है उसके बाद तमाम तरह के अन्याय व अत्याचारों की जननी यही बन गई।
भारत मे गरीबी पर खूब बहस होती है मगर सामाजिक रूप से देखोगे जाति का जैसे-जैसे वर्ण व्यवस्था के हिसाब से ऊपर से नीचे जाओगे तो गरीबी के आंकड़े बढ़ते जाएंगे यानि जो जितनी निम्न जाति समझी जाती है उसमें गरीबी उतनी ही ज्यादा है!
अकेले कबीर ही नहीं लड़े थे इस व्यवस्था से!इससे पहले बुद्ध,महावीर सरीखे लोगों ने जीवन खपाया था!रैदास,गुरुनानक,संत पेरियार,नारायण गुरु,बसवन्ना, महात्मा फूले, बाबा साहेब,चौधरी चरणसिंह!न जाने कितने लोग खप गए मगर जाति है कि जाती ही नहीं!
लिखकर ले लो इस देश मे जाति कभी खत्म नहीं होगी।जाति के खिलाफ लड़ने का जो भी दावा करता है वो इन पुरखों के संघर्ष को ढंग से पढ़ ले।ये कोई छोटे-मोटे आदमी नहीं थे!जाति मिटाने के जितने भी आंदोलन हो रहे है,सेमिनार हो रहे है,गोष्ठियां हो रही है वो सब अंधेरे में तीर मार रहे है!
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें