भारतीय समाज के वर्तमान स्वरूप को देखा जाए तो त्रिस्तरीय नागरिक पाए जाते है।पहला वो,जो नितांत अनपढ़ है।दूसरा वो जो शिक्षित है मगर बेवकूफ है।तीसरा वो जो शिक्षित है और समझदार भी है।यह शिक्षा के आधार पर नागरिकों का त्रिस्तरीय ढांचा है।
संसाधनों के वितरण को लेकर भी उच्च वर्ग,मध्यम वर्ग व निम्न वर्ग,त्रिस्तरीय ढांचा है।धर्म को लेकर भी कट्टर धार्मिक,सेक्युलर व नास्तिक का त्रिस्तरीय स्वरूप नजर आता है।
भारतीय समाज विचारों व चेतना के संघर्ष से जूझ रहा है।इसमें उपरोक्त तीनो आधार के वर्गीकरण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।वर्तमान समस्याओं के फैलाव,संसाधनों के वितरण,विकास का स्वरूप,जागरूकता व आगे बढ़ने के रास्ते को अगर एक समाजशास्त्री के नजरिये से समझना चाहे तो इन त्रिस्तरीय तीनों वर्गों का क्रॉस संकरण करके विश्लेषण करना चाहिए।
हम न्यून से अधिकता के क्रम में तीनों आधार से एक-एक वर्ग को लेकर जांचते है कि समाज व देश किस तरफ जा रहा है!
समूह A
1.नितांत अनपढ़
2.निम्न वर्ग
3.सेक्युलर
1.नितांत अनपढ़
2.निम्न वर्ग
3.सेक्युलर
आपको यह सोचकर हैरानी होगी कि सेक्युलर को मैंने न्यून वर्ग में शामिल किया है मगर मेरे सोचने का नजरिया अलग है।एक निम्न वर्ग(गरीब) के अनपढ व सेक्युलर इंसान की वर्तमान भारत मे क्या भूमिका है?अनपढ़ है इसलिए नई चेतना के संसाधनों से पूर्णतया वंचित है।सेक्युलर है इसलिए जो भी सुनेगा उसको या तो पूर्णतया सच मान लेगा या पूर्णतया नकार देगा।उसके पास नई चेतना के आगमन का माध्यम क्या है उस पर निर्भर करेगा कि वो वास्तव में उसको जागरूक करना चाहता है या झूठ द्वारा उसको उपयोग में लेने का प्रपंच कर रहा है।इस तरह के लोगों के पास चेतना के नाम पर अपना कुछ नहीं है मगर उसके पास ग्रहण करने या नकारने के विकल्प जरूर मौजूद है।ग्रहण करना चाहता है तो भी उसके पास दो विकल्प निश्चित है दाता सच्चा है या झूठा!आप इसे रिस्क के रूप में प्रतिशत में बदलकर देखे तो 50%नकारना 50%स्वीकारना है।स्वीकारने को दुबारा विभक्त करना पड़ेगा,अगर दाता सच्चा है तो 25%और दाता झूठा है तो 25%।ऐसे लोगों के लिए एक चौथाई रास्ता बाकी लोगों की तुलना में आगे बढ़ने के लिए उपलब्ध होता है।उसको स्वीकारना भी है और उसको दाता भी सच्चा मिलना चाहिए तब जाकर।
भारत की एक चौथाई आबादी इसी वर्ग में आती है।जिसकी आधी अर्थात 50% जड़ता की शिकार होकर उपलब्ध अवसरों को नकार देती है और 25%अवसर पाने में सफल हो जाती है और 25%अवसर के झांसे में आकर खत्म हो जाती है।नकारने में सबसे ज्यादा किसान वर्ग आता है,स्वीकारने में सामाजिक रूप से निम्न समझी जाने वाली जातियों के लोग आते है।नकारने वाले लोगों की बर्बादी धीरे-धीरे आती है इसलिए उनके अंदर सहनशक्ति प्रचुर मात्रा में होती है।स्वीकारने वालों में से 25%लोग ऊपरी वर्ग में छलांग मारने में कामयाब हो जाते है और 25%लोग बर्बाद हो जाते है।जो ऊपरी वर्ग में छलांग मारने वाले लोग है ये धार्मिक होने की प्रक्रिया में होते है इसलिए ये लोग ऊपरी वर्ग अर्थात बीच के वर्ग में भी जाकर दोयम दर्जा बना पाते है!आजादी के समय वाली खेती अब तक करने वाले,पैदल धार्मिक यात्राओं में चलने(पीर बाबा,ख्वाजा साहब की दरगाह व वैष्णो देवी जाने वाले एक ही वर्ग के लोग है) वाले,कुपोषित,इलाज के अभाव में दम तोड़ने वाले लोग इसी वर्ग के होते है।धार्मिक जुलूसों,राजनैतिक सभाओं की भीड़ का हिस्सा ये ही लोग बनते है।
समूह B
1.शिक्षित मगर बेवकूफ
2.मध्यम वर्ग
3.धार्मिक
1.शिक्षित मगर बेवकूफ
2.मध्यम वर्ग
3.धार्मिक
यह तीनों आधार का बीच का वर्ग है।इनकी शिक्षा का स्तर सिर्फ साक्षर से लेकर पीएच डी तक का हो सकता है।इन्होंने कुछ रिस्क स्वीकार किये और गरीबी का दुष्चक्र तोड़कर ऊपरी छलांग लगाई है और अपने धर्म का पालन करते है मगर दूसरे धर्मों का भी सम्मान करते है।इसमें भारत की आधी आबादी आती है।वर्तमान में ऐसे लोगों की पहचान बड़ी आसान है।सर्जन होगा मगर ऑपरेशन थिएटर में हनुमान चालीसा बजाते हुए अगरबत्ती करेगा फिर ऑपरेशन शुरू करेगा।वैज्ञानिक होगा मगर अगरबत्ती करके सैटेलाइट लांच का बटन दबाएगा।टीचर होगा तो सरस्वती की वंदना करके उसको ज्ञान की देवी बताते हुए बच्चों को विज्ञान की किताब पढ़ायेगा!व्यापारी है तो ग्राहक बाहर इंतजार करेगा मगर पूरी दुकान/कार्यालय के डिब्बो/कोनो में अगरबत्ती लिए घूमेगा।कहीं नौकरी करता है तो सुबह पूजा/इबादत करते हुए पूरा दिन अच्छा गुजरने की मनौती मांगकर घर से निकलेगा और रास्ते मे पड़ने वाले मंदिरों/मजारों से दुआ मांगता हुआ निकलेगा।धर्म के नाम पर दंगे-फसादी लोग ये ही होंगे और व्यक्तिवादी राजनीति के जयकारे लगाने वाले भी ये ही होंगे!
यह अपने निचले वर्ग को हेय दृष्टि से देखेगा व ऊपरी वर्ग को निहारता रहेगा।थिएटर में पिक्चर देखते हुए पॉपकॉर्न खरीदेगा और पिक्चर के बजाय घर आकर पॉपकॉर्न की महंगाई पर चर्चा करेगा।कामचोरी का हर हथकंडा ढूंढता नजर आयेगा।इस वर्ग का 90%हिस्सा खुदगर्ज होता है।भारतीय संस्कृति व विरासत का ढोंग करता हरदम नजर आयेगा मगर दुनियाँ के सारे एशो-आराम हर बंधन तोड़कर तलाशता घूमेगा।इसी वर्ग का 50%हिस्सा प्रत्यक्ष रूप से नीचे से ऊपर खींचता है व 50% प्रत्यक्ष रूप से ऊपर से नीचे की तरफ खींचता है।जब अपने से निचले वर्ग से जुड़ता है तो वो निचले वर्ग की चेतना को 25%सच्चाई उपलब्ध करवाता है व 25%लोगों को बर्बाद करने में कामयाब हो जाता है।जब अपने से ऊपर वाले वर्ग से जुड़ता है तो नई चेतना/विचार प्राप्त करता है मगर खुदगर्जी इतनी होती है कि प्राप्त चेतना को खुद तक सीमित कर लेता है।इक्के-दुक्के लोग होते है जो प्राप्त चेतना को अपने से निचले वर्ग में बांटते है।ये लोग चाहे तो निचले वर्ग को साथ लेकर क्रांति ला सकते है और चाहे तो आंदोलन का स्वरुप दे सकते है।ये अपनी धार्मिकता का चेतना के साथ गठजोड़ करके निचले वर्ग में बड़ी सेंध लगा सकते है।निर्भर इनके ऊपर करता है कि ये बाबा बनकर निचले वर्ग को लूटना चाहते है या मसीहा बनकर क्रांति करना चाहते है।एक बात स्पष्ट है कि क्रांति कभी अहिंसक नहीं हो सकती!हाँ, आंदोलन अहिंसक हो सकते है।क्रांति व्यवस्था परिवर्तन का हथियार है और आंदोलन हिस्सेदारी मांगने का,ताकतवर के सामने शांतिपूर्वक कटोरा लेकर भीख मांगने का जरिया है।
समूह C
1.शिक्षित व समझदार
2.उच्च वर्ग
3.नास्तिक
1.शिक्षित व समझदार
2.उच्च वर्ग
3.नास्तिक
इस वर्ग के लोग अपने आप से स्पष्ट होते है।अच्छे पढ़े लिखे होते है,समझदार होते है,संसाधन प्रचुर मात्रा में होते है और धार्मिक होने के लाख दावे करे मगर अंतर्मन से नास्तिक होते है।भारत मे यह आबादी 25%के करीब है।हर क्षेत्र में ये लोग नेतृत्वकर्ता के रूप में होते है और इनके बीच सर्वश्रेष्ठ होने की अहिंसक प्रतियोगिता चलती रहती है।ये लोग धार्मिक होने का ढोंग करने के लिए बीच-बीच मे धार्मिक स्थलों का दौरा कर लेते है व दान/चंदा दे आते है।ये दिमाग से शातिर मगर दिल से कायर लोग होते है।इनके लिए मानवता के कोई मायने नहीं होते है।राष्ट्रभक्ति जाति/धार्मिक आदि बंधनो से पूर्णतया मुक्त होते है।75%जनता इनकी ग्राहक मात्र होती है या मैनपावर हासिल करने की मंडी!इससे ज्यादा रिश्ता इनका 75%जनता से नहीं होता है।
असल मे देखा जाए तो यह C समूह B समूह को माध्यम बनाते हुए A समूह का हत्यारा है।एक समाजशास्त्र का विद्यार्थी होने के नाते यह मेरा आकलन है।आप भी सुझाव देकर मदद कर सकते है।

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