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  बीएसएनएल इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि जून महीने का अपने कर्मचारियों को वेतन देने में असमर्थता व्यक्त कर रहा है!

बीएसएनएल के इतिहास पर नजर डाले तो इसकी जड़ें ईस्ट इंडिया कंपनी में मिलती है।टेलीकॉम से पहले टेलीग्राफ ही था और पहली टेलीग्राफ लाइन कलकत्ता से डायमंड हार्बर के बीच 1851 मे डाली गई और उसके बाद पूरे देश मे जाल बिछाया गया।1885 में इंडियन टेलीग्राफ एक्ट बनाया गया और यह सेवा सार्वजनिक उपयोग के लिए खोल दी गई।

1980 में पोस्ट व टेलीग्राफ डिपार्टमेंट को अलग कर दिया गया।1990में टेलीग्राफ व टेलीफोन लाइन को भारत सरकार द्वारा एक उपक्रम के रूप में चलाया गया व 15सितंबर2000को बीएसएनएल की स्थापना की गई।बीएसएनएल ही टेलीग्राफ सेवाएं देता रहा और 15जुलाई2013को यह बंद कर दी गई।

आज पूरे देश मे बीएसएनएल लैंडलाइन ,मोबाइल,ब्रॉडबैंड,इंटरनेट टेलीविज़न व आईपीटीवी सेवाएं दे रहा है।आज तकरीबन साढ़े ग्यारह करोड़ सदस्य व 1लाख 83 हजार कर्मचारी है व कुल परिसंपत्तियों का आंकड़ा 2016में 70,746करोड़ रुपये था।

2016में बीएसएनएल की आय 31533करोड़ थी मगर ऑपरेटिंग खर्चे के कारण 4793करोड़ रुपये घाटे में रही।2017 में आय 25071करोड़ रही और 7993करोड़ रुपये घाटे में रही।2018 में आय घटकर 18865करोड़ रुपये हो गई और घाटा बढ़कर 13804करोड़ हो गया।यह तीनों साल सरकारी बेरुखी व जिओ के उत्थान के काल रहा है जिसमे खुद प्रधानमंत्री जिओ के विज्ञापन में ब्रांड अम्बेसडर नजर आए थे!

इसमें बीएसएनएल के मैनेजमेंट व अधिकारी-कर्मचारियों को भी पाक साफ घोषित नहीं किया जाना चाहिए।जब निजी टेलीकॉम कंपनियां हाथोंहाथ मोबाइल सिम एक्टिवेट कर रही थी उस समय बीएसएनएल व एमटीएनएल 3दिन का समय ले रही थी!लैंडलाइन की कहानी तो और भी खराब थी।बिना रिश्वत के कर्मचारी महीनों तक इंस्टाल नहीं करते थे।कहने का तात्पर्य यह है कि निजी टेलीकॉम कंपनियां जब मार्किट पर कब्जा कर रही थी तब बीएसएनएल ध्रतराष्ट्र बनकर पुरानी अकड़ पर ही बैठा रहा।

आज हालात सबके सामने है।इतनी 19साल पुरानी व इतनी बड़ी कंपनी जब धराशायी होने लगे तो देशभर में भूचाल आना तय है।सरकार 20हजार करोड़ रुपये के 4G स्पेक्ट्रम बीएसएनएल को बैलआउट के रूप में देने का प्रस्ताव ला रही है।कर्मचारियों को वीआरएस देने के लिए भी 40हजार करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव भी है!कुल मिलाकर बीएसएनएल के लिए 60,000करोड़ रुपये का राहत पैकेज है।सबसे गौर करने वाली बात यह है कि सरकार के पास कर्मचारियों को देने के लिए फिलहाल 13000करोड़ रुपये नहीं है!

बेहतर होता सरकार 13हजार करोड़ रुपये तत्काल देकर बीएसएनएल को सुधारने की कोई कोशिश करती!कर्मचारियों की छंटनी करने से कई लोग बेरोजगार हो जाएंगे और नए रोजगार के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे।13000करोड़ रुपये तो अकेले गुजरात के संदेसरा बंधु लेकर भाग गए है!

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