शाहीन बाग,लोकतंत्र के माथे पर कलंक!

शाहीन बाग,लोकतंत्र के माथे पर कलंक!

दिल्ली के शाहीन बाग में जो धरना-प्रदर्शन चल रहा है वो सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर में भारतीय लोकतंत्र पर सवाल खड़ा कर रहा है।15 दिसंबर से लगातार बूढ़ी औरते व मासूम बच्चे इतनी ठंड में जुटे हुए है।

मानता हूँ कि 95 साल से जो आरएसएस ने नारे व नरेटिव तैयार किये है उसकी सफलता के बुते इनको अंधेरी रात में कुचल दिया जायेगा जिस तरह रात के 2 बजे रामलीला मैदान में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने बाबा रामदेव के आंदोलन को कुचला था!

दोनों आंदोलन का मोटो अर्थात उद्देश्य अलग हो सकते है मगर सरकार ने एक बार भी आंदोलनकारी लोगों से वार्तालाप करना उचित नहीं समझा।

जो ट्रिपल तलाक बिल को संसद में पास करते समय बड़े-बड़े भाषण दिए गए थे वो अब खुद ही धराशायी होते नजर आ रहे है!मुस्लिम बहनों को न्याय की हुंकार भर रही सरकार एकाएक शाहीन बाग का मामला आते ही अपनी आईटी सेल को आगे करके पीछे शांति से बैठ गई!

मैं लिख नहीं सकता कि इनकी आईटी सेल के लोग व बेभाड़े की भेडें इन माताओं-बहनों के बारे में क्या-क्या लिख रही है!500रुपये की बिकाऊ औरतें,धरना खत्म करो नहीं तो जच्चा-बच्चा अस्पताल खोलना पड़ेगा,धंधे वाली औरतें,शिफ्ट वाली औरतें,खाने-पीने को आने वाली औरते!न जाने क्या-क्या लिखा जा रहा है!

अगर इनकी बातों को सच भी मान लिया जाएं तो!

अगर भारत की नागरिक 500रुपये में बिक रही है!
अगर भारत की औरतें धंधा करती है!
अगर भारत की औरतें खाने के लिए आएं!

तो एक देश के रूप में तो हमे स्वीकार करना होगा कि आजादी के बाद इनकी उन्नति के लिए हमारी सरकारों ने कुछ नहीं किया!

अगर इनकी बातों को दरकिनार कर दिया जाएं तो इनको पैदा करने वाली फैक्ट्री पर तो सवाल खड़ा होता ही है!

क्या हमारे घरों में माँ-बहन,बेटियां नहीं है?क्या हम उनके चेहरे नहीं देखते है?क्या इस तरह सोशल मीडिया में लिखने से दुनियाँ में हमारा डंका बज रहा है?

CAA व एनआरसी को लेकर वर्तमान सरकार ने ध्रुवीकरण करने के लिए जानबूझकर भ्रम फैलाया है।प्रधानमंत्री से लेकर गृहमंत्री तक उल्टे सीधे बयान दे रहे है।किसी समुदाय विशेष के दिलों में इस कानून को लेकर कोई शंका पैदा हुई तो उसके निस्तारण की जिम्मेवारी सत्ता में बैठे लोगों की है।

जो गजट नोटिफिकेशन जारी हुआ है उसमें धार्मिक प्रताड़ना के आधार पर कहीं भी नागरिकता देने का कोई जिक्र नहीं है फिर गृहमंत्री तमाम धर्मों की लिस्ट लेकर क्यों बखान कर रहे थे!

सवाल CAA को लेकर नहीं है जैसा सरकार व मीडिया प्रचारित कर रहे है!सवाल इससे आगे का है।जब अगला कदम अर्थात NRC जिसका वादा बीजेपी ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में किया था और खुद गृहमंत्री ने कहा है कि इससे एक इंच भी पीछे हटने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है।असम की हकीकत देशभर के सामने आ चुकी है।महीनों तक लोग देश के कोने-कोने से भागकर असम जाकर अपने डाक्यूमेंट्स जमा करवा रहे थे।नतीजे में 19लाख लोग नागरिकता से वंचित कर दिए गए जिसमे 14लाख से ज्यादा गैर-मुस्लिम थे!

गैर-मुस्लिमों को CAA के माध्यम से नागरिकता दे दी जायेगी मगर मुस्लिमों का क्या?अगर यह CAA एक्ट लागू रहता है और बीजेपी अपने वादे के मुताबिक NRC भविष्य में लागू करती है तो गैर-मुस्लिम डाक्यूमेंट्स पेश नहीं कर पाएंगे उनको तो इस एक्ट से नागरिकता मिल जाएगी मगर मुस्लिमों का क्या?

एक बात गौर करने वाली और है कि जो ओबीसी,एससी, एसटी के लोग खुद को हिन्दू नहीं मानते है और डाक्यूमेंट्स नहीं जुटा पाए उनको अगर देश मे रहना है तो खुद को हिन्दू बताना ही पड़ेगा!यही कारण है कि आज मुस्लिमों के साथ देशभर में ओबीसी,एससी, एसटी के लोग विरोध कर रहे है!

अभी तक सरकार की तरफ से संवाद की कोई कोशिश नहीं की गई है!किसी भी धरनास्थल पर सरकार का कोई प्रतिनिधि नहीं गया है और न धरना देने वाले लोगों को बातचीत के लिए बुलाया है!

मीडिया व आईटी सेल के माध्यम से जो विरोध कर रहे है उनको बदनाम किया जा रहा है अर्थात एक एजेंडे के तहत लोकतंत्र में उठ रही विरोध की आवाजों को कुचला जा रहा है!सवाल करना व सत्ता द्वारा सवालों के जवाब देना लोकतंत्र की बुनियाद है।लोकतांत्रिक सरकारों का इस तरह का चरित्र कभी नहीं होता।

एक मजबूत आईटी सेल,अंधभक्तों की भीड़ व षड्यंत्रकारी निजामों का गठजोड़ भारतीय लोकतंत्र के लिए घातक परिणाम ला रहा है!अगर बिना संवाद के विरोध में उठी आवाजों को दबा दिया गया तो लोकतंत्र को ठेंगे पर रखकर चलने की आदत हो जाएगी!

दिल्ली हाइकोर्ट द्वारा शाहीन बाग का धरना खत्म करने का आदेश लेने की नाकाम कोशिश के बाद तेज तर्रार वकील व सामाजिक कार्यकर्ता अमित साहनी सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुके है!बिना संवाद व विश्वास दिलाये अगर यह धरना कोर्ट के आदेश या अन्य कारण बताकर बलपूर्वक खत्म किया गया तो यह भारतीय लोकतंत्र पर ऐसी कालिख पोत देगा जिसको धोने में हमे सदियों तक संघर्ष करना पड़ेगा!

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